
लखनऊ/आगरा, 12 जुलाई 2026:
यूपी में नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने आगरा में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के संगठित दवा सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में गठित 15 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने शहर के कई प्रमुख दवा बाजारों में एक साथ छापेमारी कर नकली दवाओं, सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग, अवैध री-लेबलिंग और फिजीशियन सैंपलों की बिक्री जैसे गंभीर खेल का खुलासा किया।
कार्रवाई के दौरान कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार, कृष्णा कॉम्प्लेक्स, नवबिया मार्केट और कोतवाली क्षेत्र की 13 दवा फर्मों पर छापे मारे गए। मोहन ट्रेडर्स और मनी मेडिकल को सील कर दिया गया। नीलकंठ और मनु फार्मा समेत अन्य प्रतिष्ठानों पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। मौके से 35 संदिग्ध दवाओं के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

पूरे मामले की शुरुआत टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स की Chymoral Forte और Shelcal के नकली होने की शिकायत से हुई थी। जांच में खरीद-बिक्री के फर्जी बिल, बिना वैध दस्तावेज दवाओं की आपूर्ति और गोरखपुर, आगरा तथा कोलकाता तक फैला अंतरराज्यीय नेटवर्क सामने आया। लैब जांच में Chymoral Forte अधोमानक और ACILOC नकली पाई गई जिसकी कंपनी ने भी पुष्टि की। पूछताछ में कई कारोबारियों ने बिना बिल दवाएं खरीदने की बात स्वीकार की।
एफएसडीए की जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी और अस्पतालों की आपूर्ति वाली जीवनरक्षक दवाओं पर लगे Not for Sale और ESI Supply जैसे चिन्ह हटाकर उन पर नए लेबल और मनमानी एमआरपी लगाकर खुले बाजार में बेचा जा रहा था। युग फार्मा, शारदा फार्मा, आरएमडी फार्मा और अन्य प्रतिष्ठानों से जुड़े मामले में बिना कोल्ड-चेन इंसुलिन रखने, री-लेबलिंग और सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां भी सामने आईं। एसटीएफ की पूछताछ में सरकारी दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में उतारने के पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
एक से तीन जुलाई के बीच हुई जांच में वीए मेडिकोज से Jardiance, Telma-H, Thyrox और Gluconorm PG-2 जैसी दवाओं की री-लेबलिंग, नकली Telma-H, करीब 1.88 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग और वाहन व ऑटो-रिक्शा के जरिए नकली दवाओं को वैध दिखाने के सबूत मिले। इसके आधार पर 14 संचालकों के खिलाफ तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है।
डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर मई 2026 से चल रहे अभियान में अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की नकली, अवैध, सरकारी और डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। अब तक 58 थोक दवा लाइसेंस निरस्त अथवा निलंबित किए जा चुके हैं। तीन नई एफआईआर के बाद अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़कर नौ हो जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को नकली दवाओं, अवैध री-लेबलिंग और अंतरजनपदीय नेटवर्क पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही दवा व्यापारियों से कथित अवैध वसूली की शिकायतों की भी जांच कर दोषियों पर एक्सटॉर्शन का मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी है।






