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पर्यावरण संरक्षण में UP ने लिखा नया अध्याय, 9 साल में हरित विकास की बनी नई मिसाल

सुरक्षित पेयजल से लेकर गंगा की स्वच्छता, 240 करोड़ पौधरोपण, 69 हजार अमृत सरोवर, वेटलैंड संरक्षण, स्वच्छ हवा और वन्यजीव सुरक्षा तक योगी सरकार के प्रयासों ने बदली प्रदेश की पर्यावरणीय तस्वीर

लखनऊ, 12 जुलाई 2026:

यूपी ने नौ वर्षों में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव की दिशा में कई बड़े कदम उठाए हैं। सुरक्षित पेयजल, नदियों के पुनर्जीवन, हरित आवरण के विस्तार, आर्द्रभूमियों के संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छ वायु, वन्यजीव सुरक्षा और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसी योजनाओं के जरिए प्रदेश ने पर्यावरणीय विकास का नया मॉडल प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। इन पहलों का उद्देश्य केवल प्रकृति का संरक्षण ही नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य, आजीविका और जीवन स्तर में सुधार भी रहा है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया, गाजीपुर, मऊ, वाराणसी, चंदौली और सोनभद्र जैसे जिलों में वर्षों से भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की समस्या गंभीर थी। लाखों लोग असुरक्षित हैंडपंपों पर निर्भर थे, जिससे आर्सेनिकोसिस, फ्लोरोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता था। योगी सरकार ने जल जीवन मिशन और राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के तहत सतही जल आधारित पाइप पेयजल योजनाओं का तेजी से विस्तार किया। आधुनिक तकनीकों और सुरक्षित जल स्रोतों के माध्यम से हजारों गांवों तक स्वच्छ नल जल पहुंचाया गया, जिससे जलजनित बीमारियों के खतरे में उल्लेखनीय कमी आई।
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गंगा को स्वच्छ और अविरल बनाने के लिए नमामि गंगे मिशन के तहत बड़े पैमाने पर कार्य किए गए। कानपुर के सीसामऊ नाले से प्रतिदिन गंगा में गिरने वाले लगभग 140 एमएलडी गंदे पानी को रोककर आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया गया। वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर सहित कई शहरों में सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाई गई और औद्योगिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया। वहीं ‘एक जिला-एक नदी’ अभियान के तहत गोमती, हिंडन, तमसा और अन्य छोटी नदियों के पुनर्जीवन के लिए अतिक्रमण हटाने, गाद निकालने और सीवरेज नेटवर्क विकसित करने जैसे कार्यों ने जल स्रोतों को नई जीवनधारा दी।

हरित उत्तर प्रदेश अभियान के तहत वर्ष 2017 से 2026 के बीच 240 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। स्थानीय प्रजातियों के वृक्ष, नदी किनारे पौधरोपण, नगर वन, मियावाकी वन और सैटेलाइट आधारित निगरानी ने हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की क्षमता को भी मजबूत किया। आर्द्रभूमियों के संरक्षण में नवाबगंज, सांडी, समसपुर, सुर सरोवर और सुरहा ताल जैसे वेटलैंड्स का पुनरुद्धार किया गया। सुरहा ताल का भारत के 100वें रामसर स्थल के रूप में चयन प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया।
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जल संरक्षण की दिशा में मिशन अमृत सरोवर के तहत लगभग 69 हजार तालाबों और पारंपरिक जल निकायों का पुनर्जीवन किया गया। विशेष रूप से बुंदेलखंड में चेक डैम, तालाबों के पुनरुद्धार, वाटरशेड विकास और केन-बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया गया। वहीं वैज्ञानिक भूमि सुधार कार्यक्रमों के जरिए लाखों हेक्टेयर ऊसर और क्षारीय भूमि को खेती योग्य बनाकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य हुए।

वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने एयरशेड आधारित रणनीति अपनाई। जिग-जैग तकनीक वाले ईंट भट्ठों को बढ़ावा देने, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन और रियल टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग जैसी पहलों ने स्वच्छ हवा की दिशा में नई उम्मीद जगाई। लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर में नगर वन, जैव विविधता पार्क और ग्रीन बेल्ट विकसित कर शहरी हरित क्षेत्र का विस्तार किया गया।

वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में दुधवा लैंडस्केप, तराई क्षेत्र, रानीपुर टाइगर रिजर्व और चंद्रप्रभा वन क्षेत्र में आवास संरक्षण, वन बहाली, सोलर फेंसिंग और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की स्थापना जैसे कदम उठाए गए। गोरखपुर में स्थापित जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण की देश की महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। वहीं सारस, गंगा डॉल्फिन और मीठे पानी के कछुओं के संरक्षण के लिए भी विशेष अभियान चलाए गए।

इसके अलावा सौर ऊर्जा आधारित पेयजल और सिंचाई योजनाओं के विस्तार, गंगा किनारे जैविक खेती को बढ़ावा, सिंगल यूज प्लास्टिक पर नियंत्रण तथा वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में किए गए प्रयासों ने प्रदेश को स्वच्छ और टिकाऊ विकास की ओर अग्रसर किया है। इन पहलों के माध्यम से उत्तर प्रदेश पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक नई पहचान बनाने का प्रयास कर रहा है।

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