
लखनऊ, 13 जुलाई 2026:
साइबर ठगी के लिए बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) उपलब्ध कराने वाले बड़े नेटवर्क के पुलिस ने ऑपरेशन साइबर-वज्र के तहत एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ सहित चार जिलों से 33 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में 27 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है। इनमें लखनऊ के गिरोह से करीब छह करोड़ और गोंडा के नेटवर्क से 21 करोड़ रुपये के लेनदेन की पुष्टि हुई है।
लखनऊ में मड़ियांव पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय गिरोह के नौ सदस्य पकड़े गए। उनके कब्जे से 53 हजार रुपये नकद, 50 एटीएम कार्ड, तीन चेकबुक, दो पासबुक, एक कार, एक बाइक, टैबलेट और आईपैड बरामद किए गए। डीसीपी उत्तरी गोपाल कृष्ण चौधरी ने बताया कि शहर के विभिन्न एटीएम से म्यूल खातों में आई ठगी की रकम निकाले जाने की सूचना मिलने पर जांच शुरू की गई। इसके आधार पर केशव नगर मोड़ निवासी शाहरूख को गिरफ्तार किया गया। वह लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम कार्ड और पासबुक अपने कब्जे में रख लेता था। इसके बदले खाताधारकों को पांच से 25 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था।
शाहरूख की निशानदेही पर पुलिस ने गिरोह के आठ अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह पिछले छह वर्षों से सक्रिय था। खातों से निकाली गई रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर चीन सहित अन्य देशों में बैठे साइबर अपराधियों के डिजिटल वॉलेट तक पहुंचाता था। आरोपी टेलीग्राम और डार्कनेट के जरिए संपर्क में रहते थे। पुलिस गिरोह के कथित संचालक अब्दुल और आजम की तलाश में जुटी है।
लखनऊ से गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद शाहरूख, महफूज खान, सैय्यद अब्दुल्ला, मोहम्मद बसर, मोहम्मद रूबान, शाबिर, सिकंदर, फरहान और तुफैल शामिल हैं। इनमें एलएलबी और नीट की तैयारी कर रहे छात्र भी शामिल हैं। कुछ आरोपी डिलीवरी बॉय, पेंटर और फर्नीचर का काम करते थे।

गोंडा में पकड़े गए पांच आरोपी बेरोजगार युवाओं को सोलर कंपनी में नौकरी और 15 हजार रुपये मासिक वेतन का झांसा देकर उनके नाम पर करंट अकाउंट खुलवाते थे और खातों का पूरा नियंत्रण अपने पास रखते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में किया जाता था। वहीं बहराइच में दो अलग-अलग मामलों में 13 और सीतापुर में छह आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसे खाताधारक लालच, कमीशन या अनजाने में साइबर अपराधियों को इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध करा देता है। ऐसे खातों के जरिए ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजकर अपराधियों की पहचान छिपाई जाती है।






