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2029 में एक साथ होंगे लोकसभा-विधानसभा चुनाव? JPC अध्यक्ष बोले- वन नेशन-वन इलेक्शन पर तेजी से काम

लखनऊ में जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा- बार-बार चुनाव से विकास और प्रशासन प्रभावित, 18 हजार पेज से अधिक की रिपोर्ट पर हो रहा मंथन, समिति 10 राज्यों का दौरा कर जुटा चुकी है सुझाव

लखनऊ, 16 जुलाई 2026:

देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि लक्ष्य वर्ष 2029 में पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का है। इसके लिए आवश्यक संवैधानिक और कानूनी संशोधनों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा व्यापक चुनावी सुधार है।

लखनऊ में प्रेस वार्ता में पीपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से एक देश-एक चुनाव की अवधारणा का समर्थन करते रहे हैं। उनके अनुसार बार-बार होने वाले चुनावों से विकास कार्य, प्रशासनिक व्यवस्था और अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। लगातार चुनावों के कारण बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होती है और सरकारी मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी ड्यूटी में लग जाता है। एक साथ चुनाव होने से समय, संसाधनों और सरकारी धन की बचत होगी तथा शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी ढंग से संचालित की जा सकेगी।

1952 से 1967 तक साथ हुए थे चुनाव

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जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि देश में एक साथ चुनाव कोई नई व्यवस्था नहीं है। 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हुए थे। उस समय ईवीएम और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं नहीं थीं, फिर भी बैलेट पेपर से चुनाव सफलतापूर्वक कराए गए। बाद में कुछ राज्यों में राष्ट्रपति शासन, समय से पहले विधानसभा भंग होने, नए राज्यों के गठन और आपातकाल के दौरान लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाए जाने जैसे कारणों से चुनावी चक्र अलग-अलग हो गया।

वोटर बेहद जागरूक और राजनीतिक रूप से परिपक्व

पीपी चौधरी ने कहा कि भारतीय मतदाता बेहद जागरूक और राजनीतिक रूप से परिपक्व है। यह आशंका उचित नहीं है कि एक साथ चुनाव होने पर मतदाता भ्रमित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि 1952 से 1967 तक करोड़ों मतदाताओं ने लोकसभा और विधानसभा के लिए एक साथ मतदान किया था। आज मतदाता पहले से अधिक जागरूक और देश तकनीकी रूप से अधिक सक्षम है।

लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर आपत्तियां बेबुनियाद

उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव को संविधान के मूल ढांचे, संघीय व्यवस्था या लोकतंत्र के खिलाफ बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। यदि 1952 से 1967 तक एक साथ चुनावों से लोकतंत्र और संघीय ढांचे का उल्लंघन नहीं हुआ तो आज ऐसी आपत्तियों का कोई ठोस आधार नहीं है।

पीपी चौधरी ने बताया कि चुनाव आयोग ने 1983 में, विधि आयोग ने 1999 में, संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए गठित आयोग ने 2002 में और संसद की स्थायी समिति ने 2015 में एक साथ चुनाव की सिफारिश की थी। नीति आयोग ने भी 2018 में इस दिशा में कदम बढ़ाने का सुझाव दिया था।
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18 हजार पेज से अधिक की रिपोर्ट पर विचार

उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने राजनीतिक दलों, चुनाव आयोग, संवैधानिक संस्थाओं और विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद 18 हजार पेज से अधिक की रिपोर्ट सरकार को सौंपी। समिति ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के साथ स्थानीय निकाय चुनावों के लिए भी निर्धारित समयसीमा का सुझाव दिया।
संबंधित विधेयकों को संसद में पेश किए जाने के बाद संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया है। पीपी चौधरी ने कहा कि जेपीसी का उद्देश्य किसी दल के पक्ष या विपक्ष में रिपोर्ट देना नहीं, बल्कि सभी पक्षों की राय लेकर देशहित में ठोस अनुशंसाएं करना है।

10 राज्यों का दौरा कर चुकी है जेपीसी

उन्होंने बताया कि समिति अब तक करीब 10 राज्यों का दौरा कर चुकी है। उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, गोवा और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में मुख्यमंत्रियों, पूर्व मुख्यमंत्रियों, विधानसभा अध्यक्षों, राजनीतिक दलों, विधि विशेषज्ञों और संगठनों से सुझाव लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि समिति अभी केवल सभी पक्षों को सुन रही है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।

पीपी चौधरी ने कहा कि लगातार चुनावों से उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आधारभूत ढांचे से जुड़े काम प्रभावित होते हैं। चुनाव आयोग की तैयारियों पर उन्होंने कहा कि यदि उसे करीब छह महीने पहले तैयारी का समय मिले तो वह पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने में सक्षम है। समिति लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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