
लखनऊ, 18 जुलाई 2026:
यूपी स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी छलांग लगा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरेलू रूफटॉप सोलर लगाने में प्रदेश ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ते हुए देश में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। यूपी में अब तक 6,74,393 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। राष्ट्रीय रैंकिंग में गुजरात 7,49,839 स्थापनाओं के साथ पहले स्थान पर है। महाराष्ट्र 6,73,717 स्थापनाओं के साथ तीसरे पायदान पर पहुंच गया है।
प्रदेश की यह उपलब्धि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग, विभागीय समन्वय और मिशन मोड में किए गए प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है। उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ने, सोलर संयंत्र स्थापना, बैंक ऋण, डिस्कॉम निरीक्षण और सब्सिडी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सरकार ने विभिन्न स्तरों पर लगातार प्रयास किए हैं।
2.28 गीगावाट क्षमता, हर दिन 6.5 करोड़ की मुफ्त बिजली
यूपी नेडा के निदेशक रविंदर सिंह के अनुसार प्रदेश में घरेलू रूफटॉप सोलर के विस्तार से अब तक लगभग 2,283.8 मेगावाट यानी 2.28 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित हो चुकी है। इससे लाखों परिवार अपनी छतों पर बिजली पैदा कर रहे हैं। रूफटॉप सोलर के कारण पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम हो रही और उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल में भी उल्लेखनीय कमी आ रही है।
प्रदेश के लाखों परिवारों को प्रतिदिन लगभग 6.5 करोड़ रुपये मूल्य की निशुल्क सौर बिजली का लाभ मिल रहा है। यह बदलाव उपभोक्ताओं को केवल बिजली इस्तेमाल करने वाले ग्राहक से आगे बढ़ाकर ऊर्जा उत्पादक बना रहा है। अब घरों की छतें बिजली उत्पादन का केंद्र बन रही हैं और अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने की क्षमता भी विकसित हो रही है।
7,000 से अधिक कंपनियां, 85 हजार रोजगार
पीएम सूर्य घर योजना ने प्रदेश में सोलर इकोनॉमी का मजबूत आधार तैयार किया है। सोलर सेक्टर से जुड़ी 7,000 से अधिक कंपनियां और व्यावसायिक इकाइयां सक्रिय हैं। इनके माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 85 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सर्वे, डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, नेट मीटरिंग, लॉजिस्टिक्स, बिक्री, मार्केटिंग और ऑपरेशन-मेंटेनेंस तक रोजगार की पूरी श्रृंखला विकसित हुई है। इसका सबसे बड़ा लाभ युवाओं, तकनीकी पेशेवरों, इलेक्ट्रिशियन, इंजीनियरों, स्थानीय उद्यमियों और छोटे कारोबारियों को मिल रहा है।

मैन्युफैक्चरिंग से लेकर ग्रीन जॉब्स तक नई अर्थव्यवस्था
रूफटॉप सोलर की बढ़ती मांग से प्रदेश में सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर, केबल, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स और मीटरिंग उपकरणों से जुड़े कारोबार को भी गति मिली है। वेयरहाउसिंग, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी नई मांग पैदा हुई है। सौर ऊर्जा अब केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं अपितु निवेश, औद्योगिक विकास, एमएसएमई विस्तार और ग्रीन जॉब्स का नया इंजन बन रही है।
9,000 एकड़ जमीन बची, 27 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी
रूफटॉप सोलर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके लिए बड़े भू-भाग की जरूरत नहीं होती। घरों और भवनों की छतों का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। प्रदेश में विकसित मौजूदा क्षमता के लिए यदि ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट लगाए जाते, तो अनुमानतः 9,000 एकड़ से अधिक अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होती। रूफटॉप मॉडल ने इस जमीन को बचाने में मदद की है।
इसके साथ ही 2.28 गीगावाट क्षमता से सालाना लगभग 3.8 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन संभव है। इससे हर साल अनुमानतः 27 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है। यह कार्बन बचत करीब 12 करोड़ से अधिक परिपक्व पेड़ों द्वारा एक वर्ष में किए जाने वाले कार्बन अवशोषण के बराबर मानी जा सकती है। इस तरह पीएम सूर्य घर योजना उत्तर प्रदेश में बिजली बचत से आगे बढ़कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता, रोजगार, उद्योग, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की एक व्यापक आर्थिक और पर्यावरणीय क्रांति का आधार बन रही है।






