Lucknow City

लखनऊ IT सिटी के लिए बड़ा फैसला : इन 11 गांवों की जमीन फ्रीज, रजिस्ट्री पर जल्द ताला!

एलडीए की 1054 हेक्टेयर की योजना को गति देने के लिए कवायद, लैंडपूलिंग जारी रहेगी लेकिन रजिस्ट्री होगी बंद, सिर्फ असली मालिक ही कर सकेंगे डील

लखनऊ, 15 अप्रैल 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ के सुल्तानपुर रोड पर विकसित होने वाली लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की महत्वाकांक्षी आईटी सिटी योजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। योजना को तेजी देने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए इसके दायरे में आने वाले 11 गांवों की जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने की तैयारी कर ली है। इस प्रस्ताव पर डीएम की सहमति मिलने के बाद अंतिम मंजूरी के लिए फाइल शासन को भेजी गई है।

उम्मीद जताई जा रही है कि इसी महीने आदेश जारी होते ही इन गांवों में जमीन की रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। एलडीए की ओर से किसान पथ के किनारे 1054 हेक्टेयर क्षेत्र में आईटी सिटी विकसित की जा रही है। यह योजना लैंडपूलिंग मॉडल पर आधारित है। इसके तहत किसानों से जमीन लेकर बदले में उन्हें 25 प्रतिशत विकसित जमीन प्लॉट के रूप में दी जाती है।

एलडीए अब तक एक वर्ष में 234 हेक्टेयर जमीन लैंडपूलिंग के जरिए हासिल कर चुका है। लगभग 800 हेक्टेयर जमीन अभी अधूरी है। इसे हासिल करने के लिए अब अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाने की तैयारी चल रही है।

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इस योजना में बक्कास, सिकंदरपुर अमोलिया, सिद्धपुरा, परेहटा, सिकदाबाद, मोहारी खुर्द, मोहारी कला, खुजौली, भटवारा, सोनई कंजेहरा और पहाड़नगर टिकरिया गांव शामिल हैं। इन सभी गांवों की जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए एलडीए ने प्रस्ताव भेजा था जिस पर डीएम ने मुहर लगा दी है।

एलडीए के अधिकारियों के अनुसार जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगने के बावजूद लैंडपूलिंग की प्रक्रिया जारी रहेगी। हालांकि इसमें सिर्फ वही लोग भाग ले सकेंगे जो मूल भू-स्वामी हैं। नए खरीदारों के लिए रास्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा क्योंकि रजिस्ट्री ही नहीं हो सकेगी।

प्राधिकरण निबंधन विभाग को सभी गाटा नंबरों का विस्तृत ब्योरा भेजेगा जिससे एलडीए के अलावा किसी अन्य के पक्ष में रजिस्ट्री न हो सके। इस फैसले से उन प्रॉपर्टी डीलरों पर भी शिकंजा कसेगा जो अवैध या विवादित जमीन की खरीद-बिक्री कर रहे थे।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन गांवों की जमीन पहले से निजी परियोजनाओं की डीपीआर में शामिल है वहां किसी भी तरह की खरीद-बिक्री अवैध मानी जाएगी। ऐसे में आईटी सिटी योजना को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

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