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मदर्स डे विशेष : मां के आंसू पोंछने वाले ‘योगी’, किसी को दिलाई आवाज, किसी को स्कूल, किसी को जिंदगी

मदर्स डे पर दिखी सीएम योगी की संवेदनशील छवि, खुशी, मायरा, अनाबी, वाची और पंखुड़ी जैसी बेटियों के जीवन में भरे उम्मीद के रंग

लखनऊ, 10 मई 2026:

आज मदर्स डे मनाया जा रहा है। यह एक दिन नहीं बल्कि मां के त्याग, प्रेम और संघर्ष को नमन करने का अवसर है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ऐसे मुखिया के रूप में उभरे हैं जिन्होंने हजारों परिवारों की जिंदगी में उम्मीद की रोशनी जगाई है। किसी मां की गोद में मुस्कान लौटाई तो किसी बेटी को नया भविष्य दिया। कानपुर की खुशी गुप्ता, मायरा, लखनऊ की अनाबी अली, मुरादाबाद की वाची और गोरखपुर की पंखुड़ी त्रिपाठी जैसे कई नाम आज इस संवेदनशीलता के प्रतीक बन चुके हैं।

हर आंख नम कर देती है कानपुर की मूक-बधिर बच्ची खुशी की कहानी

कानपुर की मूक-बधिर बच्ची खुशी गुप्ता की कहानी हर आंख नम कर देती है। नवंबर 2025 में वह घर से निकलकर करीब 90 किलोमीटर पैदल चलकर लखनऊ पहुंच गई थी। किसी तरह उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलवाया गया। खुशी ने अपने हाथों से बनाई पेंटिंग मुख्यमंत्री को भेंट की। बच्ची की हालत और उसकी प्रतिभा देखकर सीएम भावुक हो गए। उन्होंने समाज कल्याण विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और एक फाउंडेशन के सहयोग से उसके इलाज की व्यवस्था कराई।

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फिर वह बोली… थैंक्यू योगी जी

गत 26 जनवरी को खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन हुआ। अब वह सुन सकती है और बोलना भी सीख रही है। ऑपरेशन के बाद उसके मुंह से निकले पहले शब्द थे… थैंक्यू योगी जी। यह सुनकर उसकी मां गीता गुप्ता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। वर्षों बाद उनकी बेटी की आवाज सुनाई दी थी।

जनता दर्शन में मिली मायरा, सीएम ने चॉकलेट दी और स्कूल में एडमिशन भी कराया

इसी तरह कानपुर की नन्ही मायरा जनता दर्शन में मुख्यमंत्री से मिली थी। सीएम ने उसे चॉकलेट देने के साथ उसकी पढ़ाई की चिंता भी दूर कर दी। उनके निर्देश पर कानपुर के एस्कॉटर्स वर्ल्ड स्कूल में मायरा का एडमिशन कराया गया। मुरादाबाद की वाची, लखनऊ की अनाबी अली और गोरखपुर की पंखुड़ी त्रिपाठी को भी मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रतिष्ठित विद्यालयों में दाखिला और फीस में राहत मिली। अब ये बच्चियां बेहतर शिक्षा के जरिए अपने सपनों को नई उड़ान दे रही हैं।

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मां की व्यथा सुन द्रवित हुए सीएम, तत्काल कराया इलाज

मायरा की मां नेहा कहती हैं कि हम खुद को खुशनसीब मानते हैं कि योगी आदित्यनाथ जैसे संवेदनशील व्यक्ति हमारे प्रदेश के मुखिया हैं। उन्होंने हमारी बेटी का भविष्य बदल दिया। योगी आदित्यनाथ की संवेदनशीलता सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रही। सितंबर 2025 में जनता दर्शन के दौरान कानपुर के रायपुरवा से आई एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे की पीड़ा लेकर पहुंची थीं। मां की व्यथा सुनते ही सीएम द्रवित हो गए। उन्होंने तुरंत एंबुलेंस से बेटे को कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भेजवाकर इलाज शुरू कराया। उस मां की आंखों में पहली बार उम्मीद की चमक दिखाई दी।

प्रदेश में ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ शासन नहीं किया, बल्कि परिवारों के दर्द को महसूस करते हुए मांओं के आंसू पोंछने का काम किया। यही वजह है कि इस मदर्स डे पर कई परिवार योगी आदित्यनाथ को अपने जीवन की खुशियों का कारण मान रहे हैं।

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