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महंगाई, पेपरलीक, महिला सुरक्षा व अयोध्या विवाद… मानसून सत्र से पहले मायावती का सरकार-विपक्ष को बड़ा संदेश

बसपा प्रमुख ने कहा- देश गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा, राजनीतिक द्वेष छोड़कर सत्ता और विपक्ष को मिलकर तलाशना होगा समाधान, संसद का प्रभावी होना जरूरी

लखनऊ, 19 जुलाई 2026:

संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। सत्र के दौरान विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेपरलीक और भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इस बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने संसद के आगामी सत्र को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों से गंभीरता, संयम और जिम्मेदारी के साथ काम करने की अपील की है।

देश की जनता कई समस्याओं से परेशान और आक्रोशित

मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पोस्ट जारी कर सवाल उठाया कि क्या इस बार भी संसद का सत्र हंगामे, विरोध और बार-बार स्थगन की भेंट चढ़ जाएगा या देश के ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि देश की जनता महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला असुरक्षा और महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पेपरलीक जैसी समस्याओं से परेशान और आक्रोशित है। ऐसे में संसद से इन समस्याओं के संतोषजनक समाधान की उम्मीद है।

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चढ़ावा चोरी का मुद्दा संसद में भी गरमाने की संभावना

बसपा प्रमुख ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, हेराफेरी और गबन से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश और देश में व्यापक जन आक्रोश है। लोगों की नजर इस बात पर है कि धर्म के राजनीतिकरण को लेकर जवाबदेही तय होगी या नहीं। मायावती के मुताबिक यह मुद्दा संसद में भी गरमाने की संभावना है।

मुद्दों को लेकर सरकारों के रवैये पर उठाए सवाल

उन्होंने बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद के हालात, राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की मौत और विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। इसके अलावा चुनावी घोषणाओं, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ों के बढ़ते चलन और वर्षों से बसे लोगों की बस्तियों के ध्वस्तीकरण जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने सरकारों के रवैये पर सवाल उठाए।

सत्ता और विपक्ष को तलाशना होगा समस्याओं का समाधान

मायावती ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध तथा रुपये के अवमूल्यन को भी देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि सत्ता और विपक्ष को राजनीतिक द्वेष, स्वार्थ और आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर इन समस्याओं का समाधान तलाशना होगा।

जनहितैषी गुड गवर्नेंस के लिए संसद का प्रभावी होना जरूरी

बसपा प्रमुख ने चेतावनी दी कि यदि इन चुनौतियों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो करीब 140 करोड़ की आबादी वाले देश में बहुजनों और आम जनता का जीवन और कठिन हो सकता है। उन्होंने संसद से बिना उत्तेजना और विद्वेष के स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप काम करने की अपील की। मायावती ने कहा कि जनहितैषी गुड गवर्नेंस के लिए संसद का प्रभावी होना जरूरी है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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