
लखनऊ/बरेली, 23 जुलाई 2026:
यूपी सरकार बरेली मंडल को धार्मिक, सांस्कृतिक और प्रकृति आधारित पर्यटन का नया केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बरेली मंडल के पर्यटन विकास से जुड़े 32 प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि पर्यटन परियोजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगी। उनका लाभ सीधे आम लोगों और पर्यटकों तक पहुंचना चाहिए। वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में पर्यटन विभाग के 26 प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। इनमें पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह की संस्तुति पर तीन नए प्रस्ताव भी जोड़े गए हैं।
पर्यटन विभाग और धार्मिक कार्य विभाग की प्रस्तावित परियोजनाओं की अनुमानित लागत 35 करोड़ रुपये से अधिक है। बैठक में बरेली के 12, शाहजहांपुर के 8 तथा पीलीभीत और बदायूं के 3-3 प्रस्तावों के अलावा धार्मिक कार्य विभाग के दो और संस्कृति विभाग के तीन प्रस्तावों की समीक्षा की गई। जनप्रतिनिधियों, विधायकों और जिला प्रशासन के साथ चर्चा के साथ प्रस्तावित स्थलों तथा निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण भी किया गया।
बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण ‘परंपरा’ पर्यटन एवं संस्कृति वन-स्टॉप सेंटर रहा। यह पहल बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बदायूं के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को एक साझा पहचान देने का काम करेगी। इससे कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को भी व्यापक पर्यटन परिपथ से जोड़ने और मंडल की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने की उम्मीद है।
समीक्षा के दौरान बरेली के सीबीगंज में प्रस्तावित लगभग सात करोड़ रुपये की ईको-टूरिज्म परियोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। योजना के तहत हरित क्षेत्र, गज़ेबो, प्राकृतिक भ्रमण पथ और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन विभाग के प्रस्तावों में विभिन्न मंदिरों, आश्रमों, गुरुद्वारों और धार्मिक स्थलों पर बहुउद्देशीय भवन, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली, साइनेज, बैठने की व्यवस्था और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य शामिल हैं। बरेली में बालाजी मंदिर, श्री चित्रगुप्त धाम, संजय नगर गुरुद्वारा, काली माता मंदिर और काली देवी मंदिर, जबकि शाहजहांपुर में सुनासिर नाथ मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर, हनुमंत धाम और परशुराम पुरी मंदिर परिसर प्रमुख प्रस्तावों में शामिल हैं।
मंत्री ने निर्माणाधीन नाथ कॉरिडोर की प्रगति की भी समीक्षा की। अलखनाथ मंदिर, तुलसी मठ और तपेश्वर नाथ सहित प्रमुख नाथ मंदिरों में विकास कार्य जारी हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार पूरे किए जाएं ताकि नवंबर के अंत अथवा दिसंबर 2026 के मध्य तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक समेकित आध्यात्मिक पर्यटन परिपथ उपलब्ध कराया जा सके।
धार्मिक कार्य विभाग ने मीरगंज के शिव मंदिर और बदायूं के दातागंज स्थित देवी स्थल के संरक्षण एवं विकास का प्रस्ताव रखा, जबकि संस्कृति विभाग ने शाहजहांपुर के कांट, पीलीभीत के पूरनपुर और बरेली के फतेहगंज पश्चिमी के रामलीला मैदानों को वर्षभर सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना प्रस्तुत की।
मंत्री ने सभी परियोजनाओं के लिए ऐतिहासिक और धार्मिक तथ्यों का प्रमाणिक सत्यापन, भूमि की उपलब्धता, वास्तविक लागत, गुणवत्ता और दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में पर्यटन विकास की यह समीक्षा अभियान लगातार जारी रहेगा।






