
लखनऊ, 23 जुलाई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ की गोमतीनगर कॉलोनी के विभूतिखंड इलाके में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह खुद को एप्पल कस्टमर सपोर्ट के नाम पर अमेरिका के नागरिकों को जाल में फंसाता था। डर व लालच देकर उनसे गिफ्ट कार्ड, सोना और नकदी के रूप में हजारों डॉलर की ठगी करता था। पुलिस ने कॉल सेंटर के चार संचालकों को गिरफ्तार किया है। मौके पर मिले 35 कॉलिंग एजेंटों की भूमिका की जांच की जा रही है।
डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा ने बताया कि बुधवार रात विभूतिखंड थाना प्रभारी उपेंद्र सिंह जलवा बार के पास वाहन चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान साइबर हाइट बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर फर्जी कॉल सेंटर संचालित होने की सूचना मिली। क्राइम टीम के साथ छापेमारी कर पुलिस ने प्रतापगढ़ निवासी सूरज त्रिपाठी, उसके रिश्तेदार विवेक पांडेय और राहुल त्रिपाठी तथा मुंबई निवासी तकनीकी विशेषज्ञ आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिक्की को गिरफ्तार कर लिया।

जांच में सामने आया कि सूरज त्रिपाठी पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड है। आकाश फर्जी वेबसाइट और वीओआईपी (VOIP) सिस्टम संचालित करता था। गिरोह गूगल पर विज्ञापन देकर फर्जी एप्पल कस्टमर सपोर्ट वेबसाइट को प्रमोट करता था। वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर अमेरिका से आने वाली कॉल वीओआईपी के जरिए सीधे लखनऊ स्थित कॉल सेंटर पहुंचती थी, जहां एजेंट खुद को एप्पल सपोर्ट अधिकारी बताकर बातचीत शुरू करते थे। इसके बाद दूसरे सदस्य खुद को अमेरिकी एफटीसी या सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताकर पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते या लालच देकर ठगी को अंजाम देते थे।

पुलिस के अनुसार अमेरिका में मौजूद गिरोह के सदस्य ठगी की रकम इकट्ठा करते थे और हवाला के जरिए पैसा लखनऊ भेजा जाता था। कर्मचारियों को भी नकद भुगतान किया जाता था जिससे लेन-देन का कोई डिजिटल रिकॉर्ड न बन सके।
छापे के दौरान 35 वर्क स्टेशन संचालित मिले। यहां उत्तराखंड के 10, महाराष्ट्र के 9, गुजरात और नागालैंड के 3-3, असम और मणिपुर के 2-2 एजेंटों के अलावा पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कर्मचारी भी काम कर रहे थे। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि एजेंटों को ठगी की पूरी जानकारी थी या उन्हें सामान्य कर्मचारी के रूप में रखा गया था। उनके बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में तीन आपस में रिश्तेदार हैं। सूरज त्रिपाठी ग्रेजुएट है, विवेक पांडेय डिप्लोमा धारक है और डायलर ऑपरेट करता था, राहुल त्रिपाठी 12वीं पास है, जबकि आकाश फील्ड ऑपरेशन संभालता था। इनमें सूरज त्रिपाठी का राहुल त्रिपाठी मामा और विवेक पांडेय बुआ का लड़का है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह प्रतिदिन 4 से 5 हजार डॉलर तक की साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। अब पुलिस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और इसके विदेशी कनेक्शन की जांच में जुटी है।






