
लखनऊ, 29 जुलाई 2026:
यूपी में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था अब हाईटेक होने जा रही है। प्रदेश सरकार ने जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, भरोसेमंद और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के लिए देश के दो प्रतिष्ठित संस्थानों आईआईटी कानपुर (ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन) और आईआईएम इंदौर को नॉलेज पार्टनर बनाया है। इस पहल के जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल मॉनिटरिंग और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली का उपयोग कर जल जीवन मिशन की योजनाओं, नदियों की सफाई और पुनरुद्धार को नई गति दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए निर्मित, निर्माणाधीन और भविष्य की सभी योजनाओं की आधुनिक तकनीक से निगरानी समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने बताया कि आईआईएम इंदौर के साथ समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। आईआईटी कानपुर के साथ भी सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर ली जाएंगी।
आईआईटी कानपुर के सहयोग से एआई आधारित स्मार्ट निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे पाइपलाइन में होने वाले लीकेज का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। इसके साथ ही जल दबाव, क्लोरीन स्तर और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की चौबीसों घंटे निगरानी संभव होगी। विशेषज्ञ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के संचालन और रखरखाव को अधिक प्रभावी बनाने के सुझाव देंगे जबकि मौजूदा जल योजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन कर उन्हें अधिक किफायती, टिकाऊ और दक्ष बनाया जाएगा।
जल निगम एकीकृत डिजिटल ऐप और डैशबोर्ड भी विकसित करेगा। इसके माध्यम से ग्रामीण नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे और उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। इससे जलापूर्ति सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ने के साथ जल संरक्षण को भी प्रभावी बढ़ावा मिलेगा।
आईआईएम इंदौर, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) में संस्थागत और वित्तीय सुधारों की जिम्मेदारी संभालेगा। इसके तहत मानव संसाधन का पुनर्गठन, परिचालन एवं रखरखाव लागत में कमी, वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करना और विभाग के लिए नए राजस्व स्रोत विकसित करने पर काम किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि तकनीकी नवाचार और आधुनिक प्रबंधन के इस समन्वय से ग्रामीण जलापूर्ति व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और टिकाऊ बनेगी। इसका सीधा लाभ प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को मिलेगा और आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की जल प्रबंधन प्रणाली देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर सकती है।






