लखनऊ, 1 अगस्त 2026:
लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोरी के कथित नेटवर्क का पर्दाफाश किया। विजिलेंस टीम ने जोन-5 में तैनात अवर अभियंता (जेई) दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और एक निजी व्यक्ति (बिचौलिया) श्रवण कुमार को 7.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने मौके से पूरी रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली।
विजिलेंस के अनुसार शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, लखनऊ सेक्टर के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। आरोप था कि उसके निर्माणाधीन भवन पर पहुंचे जेई दिनेश कुमार वर्मा ने निर्माण रुकवाने की चेतावनी देते हुए बताया कि श्रवण कुमार ने उसके खिलाफ आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद पहले उसे श्रवण कुमार से मिलकर मामला निपटाने की सलाह दी गई और फिर एलडीए कार्यालय बुलाया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि एलडीए कार्यालय में जेई दिनेश कुमार वर्मा और सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई न करने के बदले 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। जब उसने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई तो सौदा घटाकर 7.50 लाख रुपये में तय कर दिया गया। रकम नहीं देने पर निर्माण ध्वस्त कराने और कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी गई।
विजिलेंस की गोपनीय जांच में सामने आया कि जेई, सुपरवाइजर और बिचौलिया कथित तौर पर मिलीभगत कर आईजीआरएस शिकायत का डर दिखाकर रिश्वत मांग रहे थे। जांच के दौरान मोबाइल कॉल और अन्य साक्ष्यों से रिश्वत मांगने की पुष्टि होने का दावा किया गया। शिकायत सही पाए जाने के बाद विजिलेंस ने ट्रैप की योजना बनाई।
शिकायतकर्ता शनिवार को तय रकम लेकर गोमतीनगर पहुंचा। जैसे ही तीनों आरोपियों ने 7.50 लाख रुपये की रिश्वत ली पहले से घात लगाए विजिलेंस अधिकारियों ने उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया। मौके से पूरी रकम बरामद कर ली गई। फिलहाल विजिलेंस टीम तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।






