लखनऊ, 10 जून 2026:
यूपी में आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सीएम योगी ने आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की कार्यप्रणाली और प्रगति की समीक्षा करते हुए संगठन को आधुनिक तकनीक, मजबूत जांच प्रणाली और प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र से सशक्त बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी, जालसाजी, गबन और अन्य आर्थिक अपराधों में दोषियों के खिलाफ समयबद्ध और कठोर कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में आर्थिक अपराधों से जुड़े लंबित मामलों, विवेचनाओं, गिरफ्तारी, अभियोजन, जनजागरूकता अभियानों और संगठनात्मक सुधारों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध केवल सरकारी संसाधनों को नुकसान नहीं पहुंचाते बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी कमजोर करते हैं। ऐसे मामलों में जांच की गति और गुणवत्ता दोनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026 में 31 मई तक ईओडब्ल्यू द्वारा 155 जांच, विवेचना और अनुवर्ती कार्यवाहियों का निस्तारण किया जा चुका है। इसी अवधि में 71 अभियुक्तों की गिरफ्तारी भी की गई है। मुख्यमंत्री ने पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण और वांछित अभियुक्तों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।
योगी ने कहा कि जिन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं उनमें अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण विवेचना, मजबूत साक्ष्य संकलन और प्रभावी पैरवी के माध्यम से अधिकाधिक मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही महत्वपूर्ण मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करने और दोषियों को कानून के अनुसार दंडित कराने के निर्देश भी दिए।
बैठक में ईओडब्ल्यू द्वारा विकसित केस मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) की भी जानकारी दी गई। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रकरणों के ऑनलाइन प्रबंधन, रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन रिपोर्टिंग और डैशबोर्ड आधारित अनुश्रवण की सुविधा प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने इसके प्रभावी उपयोग पर बल देते हुए कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि कोई भी जांच अधिकारी किसी मामले को तीन माह से अधिक समय तक अपने पास न रखे और इसके लिए उसकी जवाबदेही भी तय की जाए।
मुख्यमंत्री ने आर्थिक अपराधों की रोकथाम के लिए जनजागरूकता को भी बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में निवेश संबंधी ठगी, वित्तीय धोखाधड़ी, पोंजी स्कीम, मल्टीलेवल मार्केटिंग, चिटफंड घोटाले और साइबर फ्रॉड जैसे अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करना आवश्यक है। इसके लिए चल रहे जागरूकता एवं बचाव अभियानों को और व्यापक बनाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में संगठन की क्षमता वृद्धि, अधिकारियों और विवेचकों के प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा संगठन के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक अपराधों की प्रकृति लगातार जटिल होती जा रही है। इसलिए जांच एजेंसियों को आधुनिक संसाधनों और तकनीकी दक्षता से लैस करना समय की आवश्यकता है।






