Uttarakhand

‘महक क्रांति’ से किसानों की चमकेगी किस्मत… मंत्री बोले- उत्तराखंड बनेगा अरोमा उत्पादन केंद्र

सुगंधित एवं औषधीय फसलों की खेती को बढ़ावा देने का अभियान तेज, कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दी जानकारी, दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का होगा आयोजन

देहरादून, 10 जून 2026ः

उत्तराखंड सरकार राज्य में सुगंधित एवं औषधीय फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘महक क्रांति’ अभियान को और तेज करने जा रही है। इससे राज्य के करीब 91 हजार किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को देश का प्रमुख अरोमा एवं दालचीनी उत्पादन केंद्र बनाना है। यह बातें कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कही।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि एरोमेटिक खेती की सफलता को देखते हुए सरकार बड़े स्तर पर किसानों को इससे जोड़ने की योजना पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लगभग 23 हजार हेक्टेयर भूमि को इस योजना के अंतर्गत लाया जाएगा। कहा कि सुगंध पौधा केंद्र सेलाकुई के माध्यम से खेती, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुसंधान एवं व्यवसायीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के लगभग 29 हजार किसान एरोमेटिक खेती से जुड़े हुए हैं। राज्य में 200 से अधिक फील्ड डिस्टिलेशन यूनिट स्थापित की जा चुकी हैं। मंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में एरोमेटिक सेक्टर का कारोबार जहां मात्र दो करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर 100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है।

निदेशक नपेंद्र चौहान (परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान) ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में अरोमा वैलियों का भी विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नई नीति के तहत चंपावत और नैनीताल जनपदों में लगभग 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में दालचीनी (सिनेमन) आधारित कृषि को विकसित किया जाएगा। इससे किसानों, उद्यमियों और उद्योगों के लिए नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

नपेंद्र चौहान ने बताया कि दालचीनी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन भी किया जाएगा। इस दौरान दालचीनी की खेती, रोपण तकनीक, कटाई, प्रसंस्करण, नवाचार और बाजार संभावनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

कार्यशाला में श्रीलंका व इंडोनेशिया के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे, जो किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इसमें विभिन्न देशों की दालचीनी की किस्मों, छाल, पाउडर एवं उनके प्रसंस्करण की विधियों का प्रदर्शन किया जाएगा। प्रतिभागियों को विभिन्न प्रजातियों की पहचान, स्वाद, गुणवत्ता मूल्यांकन और व्यापारिक मानकों की जानकारी भी दी जाएगी।

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