
न्यूज डेस्क, 6 अगस्त 2026:
संसद के मौजूदा मानसून सत्र में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर बहस तेज है। इस आज चर्चा होने की संभावना है। यह एक कानूनी बदलाव के साथ देश में गैर-सरकारी संगठनों (NGO), सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं, उनके द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों-अस्पतालों और आम जनता से जुड़ा एक बड़ा विषय है। इसके दायरे में हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति और देश भर में दी जा रही जनसेवाएं आती हैं। आइए समझते हैं कि यह बिल क्या है और इसका देश के नागरिकों तथा गैर-सरकारी तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
FCRA क्या है और बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act (विदेशी अंशदान अधिनियम) वह कानून है जो यह तय करता है कि भारत में कौन सा व्यक्ति या संस्था विदेशों से चंदा प्राप्त कर सकती है। कानून के तहत चुनाव उम्मीदवारों, पत्रकारों, सरकारी कर्मचारियों और राजनीतिक दलों आदि के विदेशी चंदा लेने पर पूरी तरह रोक है। किसी भी NGO या ट्रस्ट को विदेशी फंड पाने के लिए गृह मंत्रालय से FCRA रजिस्ट्रेशन लेना पड़ता है, जिसे हर 5 साल में नवीनीकृत (renew) कराना होता है।
2010 से नियम यह था कि यदि किसी NGO का लाइसेंस रद्द या सरेंडर होता है तो उसकी संपत्ति सरकार के पास चली जाएगी लेकिन इसे संभालने के लिए कोई स्पष्ट तंत्र (मशीनरी) नहीं था। पिछले एक दशक में करीब 20,000 पंजीकरण रद्द होने और 15,000 की वैधता समाप्त होने से हजारों करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां बिना किसी देखभाल के अटकी रहीं। इसी प्रशासनिक कमी को दूर करने के लिए सरकार यह संशोधन विधेयक लेकर आई है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
नामित प्राधिकरण (Designated Authority) : रद्द या सरेंडर किए गए NGO की संपत्ति (जैसे इमारतें, स्कूल, अस्पताल) को संभालने के लिए एक केंद्रीय नामित प्राधिकरण बनाया जाएगा।
संपत्ति और फंड का प्रबंधन : समय पर लाइसेंस नवीनीकृत होने पर संपत्ति वापस मिल जाएगी। अन्यथा संपत्ति स्थायी रूप से प्राधिकरण के पास चली जाएगी और जमा फंड भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा : यदि संपत्ति कोई पूजा स्थल या धार्मिक ढांचा है, तो उसका धार्मिक स्वरूप वैसा ही बरकरार रखा जाएगा।
सजा में राहत : कानून के उल्लंघन पर अधिकतम सजा 5 साल से घटाकर 1 साल कर दी गई है।
सख्त शर्त : नवीनीकरण के लिए संस्था को पिछले 2 वर्षों में कम से कम 10 लाख रुपये का विदेशी फंड जनहित में खर्च करना अनिवार्य होगा।
जांच के नियम : राज्य की जांच एजेंसियों को FCRA से जुड़े मामलों में कार्रवाई शुरू करने से पहले केंद्र सरकार से पूर्व मंजूरी लेनी होगी।
FCRA संशोधन विधेयक 2026, किसे क्या मिलेगा?
सरकार व गृह मंत्रालय : लावारिस पड़ी हजारों करोड़ की संपत्तियों का सुचारू प्रबंधन।
नियमों का पालन करने वाले NGO : जो संस्थाएं पारदर्शी तरीके से काम कर रही हैं और फंड का सही इस्तेमाल कर रही हैं, उन्हें काम करने में आसानी होगी।
कानूनी सलाह देने वाली फर्में : नई प्रक्रियाओं के कारण NGO को कानूनी व प्रशासनिक मार्गदर्शन की ज्यादा जरूरत पड़ेगी।
जानिए क्या हैं चुनौती?
नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्थाएं : जो संस्थाएं विदेशी पैसों का उपयोग धर्मांतरण या संदिग्ध गतिविधियों में करती हैं, उन पर नकेल कसेगी।
छोटे और ग्रामीण NGO : पिछले 2 वर्षों में 10 लाख रुपये खर्च करने की शर्त और जटिल कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करना छोटे संगठनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
विदेशी फंड पर पूरी तरह निर्भर संगठन : लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में उनकी संपत्तियां और बुनियादी ढांचा हाथ से निकल सकता है।
सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए विदेशी पैसों के लेन-देन पर निगरानी बेहद जरूरी है। इसके अलावा, वैश्विक संस्था FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) के मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग रोकने संबंधी मानकों को पूरा करने के लिए भी यह कदम उठाया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य विदेशी चंदे के जरिए होने वाले जबरन धर्मांतरण और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर रोक लगाना है।
आलोचकों और सिविल सोसाइटी की चिंताएं
आलोचकों का तर्क है कि संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक देरी से NGO द्वारा चलाए जा रहे अस्पताल, अनाथालय और स्कूल प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि बिल में फैसले के खिलाफ अदालत में अपील करने का प्रावधान है, लेकिन यह अधिकार संपत्ति जब्त होने के बाद मिलता है। साथ ही, FATF के दिशानिर्देश पूरे NGO सेक्टर पर सख्त नियम थोपने के बजाय केवल जोखिम वाली चुनिंदा संस्थाओं पर ही लक्षित (targeted) कार्रवाई की सिफारिश करते हैं। संसद में होने वाली चर्चा यह तय करेगी कि क्या इस बिल में कोई अतिरिक्त संशोधन किए जाते हैं जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता के साथ-साथ जनसेवाओं का सुचारू संचालन भी बना रहे।






