
लखनऊ, 16 अगस्त 2026:
पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को लोकभवन में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी का करीब छह दशक का सार्वजनिक जीवन निर्विवाद और निष्कलंक रहा। वह भारतीय राजनीति के अजातशत्रु थे। ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के भाव के साथ वे जीवनभर देशसेवा में जुटे रहे।
सीएम योगी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में कश्मीर में धारा-370 के विरोध में सत्याग्रह से हुई। इसके बाद सांसद, विदेश मंत्री, नेता प्रतिपक्ष, जनसंघ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रधानमंत्री तक की विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं लेकिन हर भूमिका में उनका मूल मंत्र ‘राष्ट्र प्रथम’ ही रहा।
पद कोई भी रहा, देश हमेशा सबसे ऊपर
योगी ने कहा कि अटल जी भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता से राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, नेता सदन और प्रधानमंत्री जैसे पदों तक पहुंचे लेकिन उन्होंने कभी पद को अपने जीवन का लक्ष्य नहीं बनने दिया। जब भी देशहित की जरूरत पड़ी उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र को प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान अटल जी ने जनसंघ का जनता पार्टी में विलय कर लोकतंत्र की बहाली के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान उन्होंने सरकार की आलोचना करने के बजाय जिम्मेदार सांसद के रूप में राष्ट्र की सुरक्षा के सवाल पर सरकार के साथ खड़े होकर राष्ट्रीय एकजुटता को मजबूती दी।
NDA की नींव रखकर दिखाई राजनीतिक समन्वय की राह
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता के दौर में अटल जी ने समन्वय और सहयोग की राजनीति का उदाहरण पेश किया। 1996-98 के दौर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के निर्माण के जरिए उन्होंने दिखाया कि अलग-अलग विचारधाराओं वाले दल भी राष्ट्रहित और सुशासन के लिए साथ आ सकते हैं। आज भी भाजपा के नेतृत्व में एनडीए इसी राजनीतिक समन्वय के जरिए विभिन्न सरकारों का संचालन कर रहा है।

सहज-सरल व्यक्तित्व लेकिन इरादे थे ‘अटल’
योगी ने कहा कि अटल जी जितने सहज और सरल थे उनके संकल्प उतने ही दृढ़ थे। कारगिल संघर्ष इसका बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दुनिया ने उस समय अटल जी के दृढ़संकल्प को देखा। भारत को परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करने में भी उनके नेतृत्व की निर्णायक भूमिका रही।
योगी ने अटल जी के लखनऊ से रिश्ते को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 1957 में पहली बार बलरामपुर से संसद पहुंचने वाले अटल जी ने लखनऊ संसदीय क्षेत्र का पांच बार प्रतिनिधित्व किया। नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपने यशस्वी शासन और प्रभावी नेतृत्व की छाप छोड़ी।
इस अवसर पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल, विधायक नीरज बोरा, एमएलसी अवनीश सिंह समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अटल जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।






