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दवा के नाम पर जहर का कारोबार अब नहीं! सरकार ने खोला मोर्चा, सप्लाई चेन से बैंक खाते तक होगी जांच

UP में डमी के नाम पर लाइसेंस, फर्जी बिलिंग और स्टॉक में हेराफेरी पर सख्ती, कोडीन सिरप, पेन किलर और एनडीपीएस दवाओं की सप्लाई चेन खंगालेगा एफएसडीए

लखनऊ, 24 अगस्त 2026:

मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले नकली, अधोमानक, मिलावटी और नशीली दवाओं के कारोबार पर यूपी सरकार ने अब और कड़ा शिकंजा कसा है। दवा की दुकान पर केवल स्टॉक और लाइसेंस की जांच तक सीमित रहने के बजाय अब पूरी सप्लाई चेन की पड़ताल होगी। लाइसेंस किसके नाम पर है, कारोबार कौन चला रहा है, दवा कहां से खरीदी गई, भुगतान किस बैंक खाते से हुआ और बिलिंग सिस्टम में क्या दर्ज है? इन सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी।

प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी एसओपी में औषधि निरीक्षकों और अनुज्ञापन प्राधिकारियों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। नई व्यवस्था के तहत दवा कारोबार में फर्जीवाड़ा या संगठित नेटवर्क सामने आने पर कार्रवाई केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट तक सीमित नहीं रहेगी। गंभीर मामलों में बीएनएस, 2023 और एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं में भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

डमी के नाम पर लाइसेंस लेना अब आसान नहीं

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नए थोक औषधि लाइसेंस के लिए आवेदक और फर्म की पृष्ठभूमि का गहन सत्यापन किया जाएगा। पहले अवैध दवा कारोबार में शामिल रहे लोगों पर विशेष नजर रहेगी। ऐसे व्यक्ति पति-पत्नी, भाई-बहन, माता-पिता, अन्य रिश्तेदार या किसी डमी व्यक्ति के नाम पर नया लाइसेंस लेकर कारोबार न कर सकें। इसके लिए रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।

गंभीर उल्लंघन करने वालों को लाइसेंस लेने से डिबार किया जा सकेगा। उनके बिजनेस पार्टनर और एसोसिएट की भूमिका भी जांच के दायरे में होगी। इसके साथ ही आवासीय क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठानों को औषधि विक्रय लाइसेंस जारी करने पर भी रोक रहेगी। मौके पर निरीक्षण कर यह देखा जाएगा कि लाइसेंस के लिए बताई गई जगह वास्तव में व्यावसायिक गतिविधि के लिए इस्तेमाल हो रही है या नहीं।

लाइसेंस किसी और के नाम, कारोबार कोई और चला रहा तो कार्रवाई

सरकार ने उन कारोबारियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी की है जो लाइसेंस किसी महिला या दूसरे व्यक्ति के नाम पर लेकर वास्तविक कारोबार खुद संचालित करते हैं। निरीक्षण के दौरान बैंक खाता, जीएसटी पंजीकरण और अन्य कानूनी दस्तावेजों का मिलान लाइसेंसधारी के नाम से किया जाएगा।
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यदि लाइसेंसधारी और वास्तविक कारोबारी अलग पाए गए तो लाइसेंस के निलंबन या निरस्तीकरण के साथ अभियोजन की कार्रवाई हो सकती है। यही नहीं, दुकान के बाहर बेसमेंट, आवासीय मकान या किराए के कमरे में बिना लाइसेंस दवाओं का स्टॉक मिलने पर भी कार्रवाई होगी। यानी अब जांच का दायरा दुकान की चारदीवारी से बाहर तक बढ़ाया जाएगा।

स्टॉक कम-ज्यादा मिला तो निर्माता तक पहुंचेगी जांच

डायबिटीज, हाइपरटेंशन, एंटीबायोटिक्स, कैंसर की दवाओं और पेन किलर जैसी फास्ट मूविंग व हाई वैल्यू दवाओं के मामले में लेजर स्टॉक और वास्तविक स्टॉक का मिलान होगा। दोनों में अंतर मिलने पर दवा के स्रोत और खरीद-बिक्री की पूरी कड़ी खंगाली जाएगी।

एक ही फर्म से माल खरीदकर उसी को वापस बेचना, असामान्य रूप से कम कीमत पर दवा बेचना, सीमित विक्रेताओं के बीच क्रॉस बिलिंग या केवल कागजों में स्टॉक एडजस्ट करने जैसी गतिविधियां मिलने पर जांच निर्माता स्तर तक पहुंचेगी। दूसरे राज्यों से आने वाली संदिग्ध दवाओं के निर्माता और सप्लायर का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा।

बिलिंग सॉफ्टवेयर और बैंक खाते भी जांचेंगे

अब दवा कारोबार में इस्तेमाल होने वाला बिलिंग सॉफ्टवेयर भी जांच से बाहर नहीं रहेगा। माइनस स्टॉक, बैक डेटेड बिलिंग, डेटा डिलीट करने, दोहरे खाते रखने और वास्तविक स्टॉक छिपाने जैसे मामलों को गंभीर अनियमितता माना जाएगा। छापेमारी के दौरान सीसीटीवी डीवीआर, ई-वे बिल, ट्रांसपोर्ट रिसिप्ट, दवाओं के ब्लिस्टर पैक, बैच नंबर और मुहर की तस्वीरों समेत डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित किया जाएगा। बैंक ट्रांजेक्शन की बैक ट्रैकिंग से यह पता लगाया जाएगा कि कागजों पर दिख रहे कारोबार के पीछे वास्तव में भुगतान किसने किया और दवा की सप्लाई किसके बीच हुई।

पैकिंग से सिक्योरिटी फीचर तक होगी पड़ताल

संदिग्ध दवा मिलने पर उसके लेबल, नाम, स्पेलिंग, फॉर्मूला, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी तिथि, निर्माता या मार्केटिंग कंपनी का पता, वायल और ब्लिस्टर पैकिंग तथा सिक्योरिटी फीचर तक की जांच की जाएगी। मूल दवा के नमूने से अंतर मिलने पर बिक्री तत्काल रोककर नमूना राजकीय विश्लेषक को भेजा जाएगा। वैध स्रोत नहीं मिलने या निर्माता द्वारा दवा के निर्माण से इनकार करने की स्थिति में उसे काउंटरफीट या स्प्यूरियस मानकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी दवाओं की रिलेबलिंग पर भी नजर

सरकारी सप्लाई, ईएसआई, डिफेंस सप्लाई, फिजिशियन सैंपल या एक्सपायर्ड दवाओं को रिलेबल कर बाजार में बेचने वालों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। ऐसे स्टॉक को कब्जे में लेकर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इंसुलिन और वैक्सीन जैसे कोल्ड चेन उत्पाद निर्धारित 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बजाय सामान्य तापमान पर रखे मिलने पर भी उन्हें अभिरक्षा में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कोडीन सिरप और एनडीपीएस दवाओं पर खास नजर

कोडीन सिरप, पेन किलर और नारकोटिक्स एवं एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं के अवैध कारोबार को लेकर विशेष निगरानी रखी जाएगी। जांच में यदि संगठित नेटवर्क या अपराध की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ औषधि कानून के साथ बीएनएस और एनडीपीएस की धाराओं में भी मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। काउंटरफीट या स्प्यूरियस दवा की पुष्टि होने पर बिक्री और वितरण तत्काल रोका जाएगा, स्टॉक सीज होगा और लाइसेंस के निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। सरकार की इस नई व्यवस्था का फोकस नकली दवा पकड़ने के साथ नकली दवा तैयार करने से लेकर उसे मरीज तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने पर है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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