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लखनऊ में IKS मंच से राज्यपाल का बड़ा बयान: वेद में हर ज्ञान… वोट बैंक की देन है जाति परंपरा, दिया ये संदेश

लखनऊ में आयोजित IKS सेमिनार में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने वेदों, दशमलव और भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व सभ्यता की मजबूत नींव बताया

लखनऊ, 5 फरवरी 2026:

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के नेशनल PG कॉलेज में आज भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। कार्यक्रम में भारतीय सभ्यता, ज्ञान परंपरा और शिक्षा प्रणाली पर विस्तार से चर्चा हुई।

भारतीय और विदेशी सभ्यताओं की तुलना जरूरी

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने अपने संबोधन में भारतीय और विदेशी सभ्यताओं की तुलना करते हुए कहा कि हाल ही में गाजियाबाद में तीन बहनों द्वारा आत्महत्या की घटना सामने आई, जो कोरियन सभ्यता से प्रभावित थीं। उन्होंने कहा कि एक समय भारतीय समाज में राजा जनक स्वयं अपनी बेटी सीता के लिए स्वयंवर आयोजित करते थे, लेकिन आज समाज की दिशा बदल गई है। उन्होंने युवाओं से दोनों सभ्यताओं की तुलना खुद करने की अपील की।

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वेदों में हर ज्ञान मौजूद, दशमलव ने बदली दुनिया

शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि जब जर्मन विद्वान मैक्सम्युलर भारत आए, तो भाषा ज्ञान के अभाव में वे वेदों को पूरी तरह नहीं समझ सके। बाद में जर्मनी लौटकर अनुवाद के जरिए उन्होंने वेदों का अध्ययन किया और स्वीकार किया कि वेदों में हर विषय का ज्ञान मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत ने दशमलव प्रणाली न दी होती, तो गणित की प्रगति संभव नहीं थी। आर्यभट्ट के योगदान से ही गणित आगे बढ़ सका।

जाति नहीं, वर्ण व्यवस्था थी भारत की पहचान

राज्यपाल ने जाति व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत में कभी जाति परंपरा नहीं थी, बल्कि वर्ण व्यवस्था थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि जाति की ओर लौटने की बात बेहद गंभीर है। उनका कहना था कि जाति व्यवस्था आज की वोट बैंक राजनीति की देन है, न कि भारतीय परंपरा का हिस्सा।

प्राचीन भारत के ज्ञान से जुड़ रहा आधुनिक पाठ्यक्रम

नेशनल PG कॉलेज के प्रिंसिपल देवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नई शिक्षा नीति में IKS को शामिल किए जाने से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिली है। उन्होंने एलोरा के कैलाश मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे ऊपर से पहाड़ काटकर बनाया गया, जो भारतीय इंजीनियरिंग ज्ञान का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि नेशनल PG कॉलेज, लखनऊ विश्वविद्यालय का ऑटोनोमस कॉलेज होने के नाते अपना करिकुलम खुद डिजाइन कर रहा है, जिसमें IKS को शामिल किया गया है। उन्होंने चित्रकूट में भगवान राम और भरत के संवाद तथा महाभारत काल में भीष्म पितामह और युधिष्ठिर के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें भारतीय टैक्स सिस्टम की झलक मिलती है।

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