
लखनऊ, 23 सितंबर 2026:
टोल बचाने के लिए फर्जी फास्टैग तो आपने सुना होगा लेकिन यहां जालसाजी का खेल एक कदम आगे था। वाहन असली, नंबर किसी दूसरे वाहन का और फास्टैग भी उसी दूसरे नंबर पर! इतना ही नहीं, रास्ते में ऑनलाइन चालान होता तो वह भी असली वाहन मालिक के बजाय फर्जी नंबर वाले वाहन के खाते में दर्ज हो जाता। यानी एक ही फर्जी नंबर के सहारे टोल चोरी और चालान से बचने का पूरा इंतजाम। लखनऊ-सीतापुर हाइवे पर चल रहे इस अनोखे खेल की जांच अब टोल प्लाजा के सर्वर तक पहुंच गई है।
एसटीएफ ने लखनऊ-सीतापुर हाइवे के इटौंजा टोल प्लाजा पर छापा मारकर सर्वर, सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर और टोल संचालन से जुड़े दस्तावेज कब्जे में ले लिए। सर्वर उपलब्ध न होने के कारण टोल वसूली प्रभावित होने लगी है। टोल का संचालन लखनऊ सीतापुर एक्सप्रेसवे लिमिटेड के पास है। जांच के दायरे में कंपनी के कई अधिकारी और कर्मचारी भी हैं।
यह कार्रवाई सीतापुर निवासी मुनीश की सोमवार को गिरफ्तारी के बाद हुई। एसटीएफ के मुताबिक मुनीश फर्जी फास्टैग के जरिए टोल और ऑनलाइन चालान से बचने वाले गिरोह से जुड़ा था। उसके साथी रियाज और सिराज की तलाश की जा रही है।
सात महीने से खुल रही थी जालसाजी की परत
यह मामला करीब सात महीने पहले एआरटीओ लखनऊ दक्षिणी की शिकायत के बाद सामने आया था। सरोजनीनगर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद विवेचना एसटीएफ को सौंपी गई। जांच के दौरान टोल संचालन करने वाली कंपनी से फास्टैग लेन-देन, वाहनों की आवाजाही और अन्य रिकॉर्ड मांगे गए लेकिन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद एसटीएफ ने अदालत का रुख किया और वारंट मिलने के बाद टोल प्लाजा पर छापा मारा।

अब जब्त सर्वर और डीवीआर की जांच से पता चलेगा कि फर्जी फास्टैग वाले वाहनों ने कितनी बार टोल पार किया और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। उधर, टोल एजेंसी का कहना है कि उसे किसी गड़बड़ी की जानकारी नहीं थी। सर्वर के उपलब्ध न होने से एक दिन में करीब 18 से 20 लाख रुपये के टोल राजस्व का नुकसान होने की बात कही गई है।






