
लखनऊ, 27 अगस्त 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव की आहट के साथ सियासी वादों और दावों का दौर तेज हो गया है। योगी सरकार की ओर से अगले छह माह में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। मायावती ने इस ऐलान को देर से उठाया गया सही कदम तो माना लेकिन इसे विधानसभा चुनाव से पहले का ‘चुनावी कदम’ करार देते हुए सरकार की नीयत और अमल पर सवाल खड़े किए हैं।
मायावती ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अगर एक लाख युवाओं की नियुक्तियां पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसे अभिशाप से मुक्त रहते हुए समय से पूरी होती हैं तो यह स्वागत योग्य होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं यह घोषणा चुनावी छलावा साबित न हो जाए। इसके साथ ही उन्होंने एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के आरक्षित पदों के बैकलॉग पर भर्ती की सरकारी घोषणा की भी मांग की।
बसपा प्रमुख ने 69 हजार शिक्षक भर्ती का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आरक्षण नियमों को लेकर इन वर्गों के करीब 6,800 अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। मायावती ने सरकार से इनके प्रति सहानुभूतिपूर्वक विचार कर वास्तविक राहत देने की अपील की।
मायावती का हमला सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। बसपा प्रमुख ने कहा कि बीएसपी लगातार स्कूलों की बदहाल स्थिति सुधारने की मांग करती रही है। उन्होंने लगभग 30 हजार बंद सरकारी स्कूलों को दोबारा बेहतर ढंग से सक्रिय करने की व्यवस्था तत्काल करने की मांग की।
1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीने में (अर्थात विधानसभा आमचुनाव तक) एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा हालाँकि विलम्ब से उठाया गया सही किन्तु चुनावी क़दम ज़्यादा लगता है, फिर भी वे नियुक्तियाँ पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि के अभिशाप से मुक्त समय से पूरा हो जायें तो यह…
— Mayawati (@Mayawati) August 27, 2026
महिला मुद्दे पर भी मायावती ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा जैसी घोषणाओं से आगे बढ़कर उन्हें शोषण, अत्याचार और उत्पीड़न से बचाने के साथ सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए ठोस नीतियों की जरूरत है।
दरअसल, चुनावी माहौल में सरकार और विपक्ष के बीच घोषणाओं की होड़ का नया मोर्चा खुलता दिखाई दे रहा है। बुधवार को योगी सरकार ने छह माह में एक लाख युवाओं को नौकरी, रक्षाबंधन पर तीन दिन महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को रोडवेज बसों में निशुल्क सफर जैसी घोषणाएं की थीं। इसके कुछ देर बाद ही समाजवादी पार्टी ने भी महिला वोटरों को साधने के लिए बड़ा दांव चला और ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ के तहत सत्ता में आने पर हर महिला को सालाना 40 हजार रुपये देने का ऐलान किया।
ऐसे में मायावती के ताजा बयान से साफ है कि यूपी चुनाव से पहले नौकरी, महिला सुरक्षा, आरक्षण और शिक्षा आने वाले दिनों में विपक्ष के बड़े चुनावी मुद्दे बन सकते हैं। चुनावी मैदान सजने के साथ अब सियासी घोषणाओं के साथ उनके अमल और विश्वसनीयता पर भी मुकाबला तेज होने के आसार हैं।






