
राजकिशोर तिवारी
चंपावत, 28 अगस्त 2026:
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध मां वाराही धाम देवीधुरा शुक्रवार को आस्था, परंपरा और रोमांच से सराबोर रहा। यहां सदियों पुरानी ऐतिहासिक बग्वाल परंपरा एक बार फिर जीवंत हुई। चार खाम और सात थोक के बग्वालियों के बीच खेली गई बग्वाल इस बार पत्थरों के बजाय फल और फूलों की बरसात के बीच हुई। करीब आठ मिनट तक चले इस अनूठे आयोजन के साक्षी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बने और पूरा बग्वाल मैदान मां वाराही के जयकारों से गूंजता रहा।
सीएम का पारंपरिक छोलिया नृत्य से स्वागत
बग्वाल में शामिल होने पहुंचे सीएम धामी का पारंपरिक छोलिया नृत्य के साथ स्वागत किया गया। धामी ने मां वाराही शक्तिपीठ में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। साथ ही प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं भी दीं। सीएम ने देवीधुरा की बग्वाल को उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, आस्था और सामुदायिक सहभागिता की अनूठी मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा अनुशासन और भाईचारे का संदेश देती है। बग्वाल के बाद सभी बग्वाली एक-दूसरे से गले मिलते हैं, जो इस परंपरा की विशिष्टता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के साथ प्रदेश की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है।

देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये से बनेगी मल्टीलेवल पार्किंग
सीएम धामी ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण भी कराया जाएगा। बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने के बाद व्यवस्थाओं को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

देवीधुरा व आसपास के धार्मिक स्थलों का हो रहा विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत देवीधुरा और आसपास के धार्मिक स्थलों का विकास किया जा रहा है। मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन और 4.57 करोड़ रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं। घटोत्कच मंदिर के सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट और लधौनधुरा मेला स्थल के सौंदर्यीकरण सहित कई कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
चार खामों ने निभाई परंपरा
बग्वाल की शुरुआत मां वाराही मंदिर के प्रधान पुजारी की पूजा-अर्चना के बाद हुई। चार खाम वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया के बग्वाली पारंपरिक वेशभूषा में ढाल लेकर मैदान में उतरे। शंखनाद और मां वाराही के जयकारों के बीच फल और फूलों से बग्वाल खेली गई। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को शुभ और फलदायी माना जाता है। रक्षाबंधन के अवसर पर स्थानीय महिलाओं और बच्चियों ने धामी को राखी बांधी।

सीएम ने ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराया
उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन का उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करना भी है। सीएम ने ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, मंदिर समिति अध्यक्ष हीराबल्लभ जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और श्रद्धालु मौजूद रहे।






