
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 30 अगस्त 2026ः
उत्तराखंड की धार्मिक और पर्यटन नगरी ऋषिकेश के सुनियोजित विकास के लिए धामी सरकार ने कवायद तेज कर दी है। ऋषिकेश महायोजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में तेजी लाते हुए भवनों की ऊंचाई से लेकर सड़क, पार्किंग, यातायात, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों तक की रूपरेखा पर मंथन शुरू कर दिया गया है। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में देहरादून, टिहरी और पौड़ी गढ़वाल के संबंधित विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। ऋषिकेश का नियोजित क्षेत्र तीन जिलों में फैला होने के कारण महायोजना को अंतिम रूप देने में तीनों प्राधिकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
भवनों की ऊंचाई पर क्षेत्रवार आए सुझाव
टिहरी और पौड़ी प्राधिकरण अपने बोर्ड से स्वीकृत प्रस्ताव शासन को उपलब्ध करा चुके हैं। बैठक में इन प्रस्तावों और अधिकारियों की टिप्पणियों का परीक्षण किया गया। महायोजना में भवनों की ऊंचाई को लेकर एक समान नियम लागू करने के बजाय क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को आधार बनाने पर जोर दिया जा रहा है। टिहरी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग और विकास की जरूरतों को देखते हुए भवनों की ऊंचाई मैदानी क्षेत्रों के अनुरूप रखने का प्रस्ताव सामने आया है। वहीं, पौड़ी क्षेत्र राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से सटा होने के कारण यहां पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए भवनों की ऊंचाई सीमित रखने के सुझाव को उपयुक्त माना गया है।
पर्यटन के दबाव के बीच यातायात व पार्किंग बड़ी चुनौती
ऋषिकेश में लगातार बढ़ रहे पर्यटन और व्यावसायिक विस्तार के कारण यातायात व पार्किंग बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। महायोजना में इन समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सड़क नेटवर्क, पार्किंग, यातायात व्यवस्था, आवासीय क्षेत्रों, व्यावसायिक गतिविधियों और पर्यटन सुविधाओं का एकीकृत नियोजन किया जाएगा। सचिव आवास ने अधिकारियों को महायोजना से जुड़े लंबित मामलों का प्राथमिकता से निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश के लिए महायोजना केवल भूमि उपयोग तय करने का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में शहर के विकास की आधारशिला होगी। पर्यटन बढ़ने के साथ आबादी, वाहनों और व्यावसायिक गतिविधियों का दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में विकास को व्यवस्थित दिशा देना जरूरी है।
महायोजना में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी
सचिव ने कहा कि शासन ने महायोजना से जुड़े विभागों व विकास प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय के निर्देश दिए हैं। तकनीकी अथवा विभागीय स्तर पर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि महायोजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार की मंशा ऋषिकेश को धार्मिक पर्यटन के साथ आधुनिक और सुव्यवस्थित पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की है। प्रस्तावित महायोजना में विकास की रफ्तार के साथ शहर की पर्यावरणीय संवेदनशीलता, स्थानीय नागरिकों की जरूरत व भविष्य के यातायात दबाव को भी ध्यान में रखा जाएगा।






