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UP के MSME के लिए खुला जर्मनी का दरवाजा! यूरोप में कारोबार बढ़ाने को बड़ा करार

इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम के तहत यूपी सरकार और जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस के बीच एमओयू, निर्यातकों को जर्मन मानकों, EU नियमों और बाजार की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जाएगा

लखनऊ, 3 सितंबर 2026:

यूपी के छोटे और मझोले उद्योगों के लिए यूरोप के बाजार में दस्तक देने का रास्ता आसान बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश के निर्यातोन्मुखी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को जर्मनी के रास्ते यूरोपीय बाजारों से जोड़ने के लिए यूपी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम के तहत एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग और जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस (जीआईबीए) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

तीन साल तक प्रभावी रहेगा एमओयू

इस साझेदारी का मकसद सिर्फ कागजी समझौते तक सीमित रहना नहीं है। यूपी के उद्यमों को जर्मनी और यूरोपीय बाजार में प्रवेश के लिए व्यावहारिक तौर पर तैयार करना है। सहयोग गैर-वित्तीय, गैर-बाध्यकारी और गैर-अनन्य स्वरूप का होगा और एमओयू तीन साल तक प्रभावी रहेगा।
प्रमुख सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल ने कहा कि वर्ष 2026 भारत-जर्मनी संबंधों के लिए खास महत्व रखता है। इस वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में है। भारत में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं। ऐसे में यूपी के मजबूत विनिर्माण आधार और निर्यात के लिए तैयार एमएसएमई के लिए यूरोप में विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं।

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उन्होंने इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम को 12 महीने के संरचित मॉडल में विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इसमें उद्यमों का मूल्यांकन, बाजार का सत्यापन, जर्मनी में स्थापना और बाजार में प्रवेश के बाद सहायता जैसे चरण शामिल होंगे।

कारोबार के ठोस नतीजों पर जोर

जर्मनी के राउनहाइम शहर के मेयर डेविड रेंडेल ने साझेदारी को व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसकी सफलता केवल आयोजित कार्यक्रमों की संख्या से नहीं अपितु नए व्यावसायिक समझौतों, भारतीय कंपनियों की जर्मनी में मौजूदगी और जर्मन कंपनियों की उत्तर प्रदेश में नई परियोजनाओं जैसे ठोस परिणामों से मापी जानी चाहिए। इसके लिए इनोवेशन हब राइन-मेन को जर्मनी में संस्थागत आधार और जीआईबीए को भारतीय पक्ष के समन्वयक के रूप में विकसित करने की बात कही गई।

एमओयू के तहत यूपी के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान, पात्र उद्यमों तक कार्यक्रम की जानकारी पहुंचाने, सरकारी योजनाओं से समन्वय और उद्यमों को जर्मन बाजार के लिए तैयार करने पर काम होगा। गाजियाबाद कॉमन फैसिलिटी सेंटर के आधुनिकीकरण में जर्मन तकनीक के इस्तेमाल के साथ गुणवत्ता, परीक्षण और प्रमाणन संबंधी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।

इसके अलावा जर्मन आयात मानकों, यूरोपीय संघ के व्यापार नियमों, टैरिफ और निर्यात दस्तावेजीकरण जैसे अहम विषयों पर संयुक्त कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। जर्मन प्रौद्योगिकी प्रदाताओं से यूपी के उद्यमों का संपर्क बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहेगा।

कार्यक्रम में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद, उद्योग आयुक्त केवी पंडियन, सहायक महाप्रबंधक रितेश सक्सेना, यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन के एमडी हिमांशु कौशिक, इनोवेशन हब राइन-मेन के सीईओ स्टीफन विट्टेकिंड और जीआईबीए के चेयरमैन सेल्वकुमार पेरियासामी सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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