
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026:
WFI यानी Wrestling Federation of India के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में चार महिला पहलवानों ने दिल्ली की अदालत का रुख किया है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के तीन अगस्त के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह को आरोपों से बरी किया गया था।
फैसले की कानूनी समीक्षा की मांग
पहलवानों की ओर से सीनियर वकील रेबेका जॉन ने राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिगविनय सिंह की अदालत में क्रिमिनल रिविजन याचिका दाखिल की है। याचिका पर शनिवार को सुनवाई होनी है। इसमें दावा किया गया है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की गलत व चुनिंदा व्याख्या की गई।
याचिका में फैसले पर उठाए गए सवाल
याचिका में कहा गया है कि बरी करने का आदेश अटकलों और अनुमानों पर आधारित था। इसमें यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिलाओं के व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं को आधार बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। पहलवानों का कहना है कि शिकायतकर्ताओं की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सबूतों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए था।
घटना के समय और जगह पर कोर्ट ने उठाया था सवाल
ट्रायल कोर्ट ने मंगोलिया में ओलंपिक क्वालिफिकेशन के दौरान कथित घटना से जुड़े बयानों में विरोधाभास का जिक्र किया था। अदालत के मुताबिक, एक बयान में घटना को 2015 में तुर्की में होने की बात कही गई, जबकि बाद के बयान में उसी घटना का स्थान मंगोलिया और साल 2016 बताया गया।
अदालत ने अंतर को माना था अहम
कोर्ट ने कहा था कि घटना के देश और साल में यह अंतर मामूली या बाहरी विवरण से जुड़ा बदलाव नहीं है, बल्कि कथित घटना के मूल विवरण से संबंधित है। इसी तरह के बिंदुओं को ट्रायल कोर्ट के फैसले में महत्व दिया गया था, जिसे अब चार महिला पहलवानों ने क्रिमिनल रिविजन याचिका के जरिए चुनौती दी है।






