
लखनऊ, 28 सितंबर 2026:
कांग्रेस, सपा समेत अन्य विपक्षी दलों की ओर से ईवीएम को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद अब बसपा प्रमुख मायावती ने भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को मायावती ने चुनाव आयोग के साथ ही भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए देश में ईवीएम से चुनाव बंद कराकर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग की। उन्होंने नगीना से आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद की जीत को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
मायावती ने आरोप लगाया कि ईवीएम में धांधली करके भाजपा ने चंद्रशेखर आजाद को नगीना से जिताया जिससे बसपा को नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने दावा किया कि नगीना में चंद्रशेखर का कोई जनाधार नहीं था। भाजपा ने षड्यंत्र के तहत उन्हें चुनाव जिताया। मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर ही चंद्रशेखर देशभर में दलितों के मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
वोटर के मन में नहीं रहना चाहिए कोई संदेह
बसपा प्रमुख ने कहा कि चुनाव व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें मतदाता के मन में अपने वोट को लेकर किसी तरह की शंका न रहे। उसे यह विश्वास होना चाहिए कि उसने जिस प्रत्याशी को वोट दिया, उसका वोट उसी के खाते में दर्ज हुआ है। उनके मुताबिक यदि मतदाता के मन में वोट के किसी दूसरे प्रत्याशी के खाते में जाने की आशंका रहती है तो इससे लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था में लोगों के भरोसे पर असर पड़ सकता है।
28-09-2026 – PRESS NOTE EVM-SIR pic.twitter.com/fSsZx3BHmg
— Mayawati (@Mayawati) September 28, 2026
बसपा ने शुरू से ही किया ईवीएम के इस्तेमाल का विरोध
मायावती ने कहा कि बसपा शुरू से ही ईवीएम के इस्तेमाल का विरोध करती रही है। उन्होंने दावा किया कि जब उनकी पार्टी की बात नहीं सुनी गई तो बसपा ने ईवीएम के मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम खत्म करने के बजाय वीवीपैट की व्यवस्था का निर्देश दिया, लेकिन इससे भी उनकी आपत्तियां दूर नहीं हुईं।
उन्होंने वीवीपैट की पर्चियों की पूरी गिनती नहीं होने पर सवाल उठाया और कहा कि किसी भी मशीन को रिमोट से हैक किया जा सकता है। मायावती के मुताबिक ऐसी स्थिति में मतदाता को यह विश्वास दिलाना मुश्किल है कि उसका वोट उसी प्रत्याशी के पक्ष में दर्ज हुआ, जिसे उसने वोट दिया था।
चंद्रशेखर को लेकर दलित युवाओं को किया आगाह
मायावती ने दलित युवाओं को चंद्रशेखर आजाद के प्रभाव में नहीं आने की नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि जहां कहीं दलितों पर अन्याय या अत्याचार होता है, वहां चंद्रशेखर पहुंच जाते हैं। मायावती का आरोप है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अधिकारियों से बातचीत करने के बजाय युवाओं को सड़क पर उतारा जाता है, जिसके बाद पुलिस उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करती है और उन्हें जेल जाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि मुकदमे लंबित रहने तक युवाओं के लिए सरकारी नौकरी हासिल करने में भी मुश्किल हो सकती है। ऐसे में दलित युवाओं को सावधान रहने और चंद्रशेखर से दूरी बनाए रखने की जरूरत है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग से भ्रांतियां दूर करने की मांग
मायावती ने चुनाव आयोग से एसआईआर को लेकर फैली भ्रांतियों को समय रहते दूर करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर विपक्ष में नाराजगी है और चुनाव आयोग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। बसपा प्रमुख ने कहा कि देश में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम का इस्तेमाल तत्काल बंद होना चाहिए और बैलेट पेपर से मतदान कराया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि देश में शुरुआती चुनावों के बाद करीब पांच दशक तक बैलेट पेपर से मतदान हुआ था।
मायावती ने यह भी सवाल उठाया कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब भाजपा ने भी ईवीएम पर सवाल उठाए थे और चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। ऐसे में केंद्र में सत्ता में आने के बाद भाजपा ने ईवीएम व्यवस्था खत्म करने के बजाय इसे जारी क्यों रखा?






