
लखनऊ, 3 अक्टूबर 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) 2027 जैसे-जैसे करीब आ रहा है वैसे-वैसे प्रदेश में सियासी बयानबाजी के साथ अब ‘होर्डिंग वार’ भी तेज होता दिखाई दे रहा है। शनिवार को राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगी एक होर्डिंग ने सियासी गलियारों में चर्चा बढ़ा दी। मोहम्मद इखलाक की ओर से लगाई गई इस होर्डिंग में Gen Z के वायरल नारों की तर्ज पर लिखा गया… ‘एक कचौड़ी, दो समोसा… जनता को भाजपा पर नहीं रहा भरोसा’ और ‘एक कचौड़ी, दो समोसा… चुनाव आयोग पर न करना भरोसा।’
सपा नेता इखलाक ने कहना है कि मुद्दा सिर्फ कचौड़ी और समोसे का नहीं अपितु देश के करोड़ों युवाओं और मतदाताओं के भरोसे का है। उनका आरोप है कि जिन युवाओं से रोजगार और बेहतर भविष्य के वादे किए गए, उन्हें अब ई-रिक्शा और टैक्सी चलाने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि नौजवानों ने पढ़ाई क्या इसलिए की कि नौकरी के बजाय उन्हें रिक्शा और टैक्सी चलाने की सलाह दी जाए?

इखलाक ने चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने चंडीगढ़ मेयर चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कैमरे के सामने वोटों को लेकर विवाद सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले फरवरी 2024 में पाया था कि आठ मतपत्रों को गलत तरीके से अमान्य माना गया था और चुनाव परिणाम को पलटते हुए कुलदीप कुमार को वैध निर्वाचित मेयर घोषित किया था।
सपा नेता ने हाल में चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर सामने आई खबरों का भी हवाला दिया। एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ निर्णयों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग विचार निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उसके सभी निर्णय सर्वसम्मति से हुए हैं।
सपा नेता ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लंबे समय से ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठा रहे हैं। अखिलेश ने हाल में भी 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा कि सपा ने इस संबंध में हलफनामों के जरिए जानकारी दी थी।
इस तरह ‘कचौड़ी-समोसा’ वाला नया नारा महज एक होर्डिंग तक सीमित नहीं दिख रहा। ये 2027 से पहले सपा के चुनावी नैरेटिव में रोजगार, मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों को जोड़ने की कोशिश के तौर पर सामने आया है।






