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Lucknow : भक्तिरस की बही धारा, सुदामा चरित्र ने श्रद्धालुओं को किया भावुक, 51 तोतों को मिली आजादी

डीएवी कॉलेज में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन, पुंडरीक गोस्वामी ने समझाई अटूट भक्ति और निष्काम प्रेम की महिमा, भजन-कीर्तन पर झूमे श्रद्धालु, आरती के बाद हुआ विशाल भंडारा

लखनऊ, 10 अक्टूबर 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ के डीएवी कॉलेज में सात दिनों से बह रही भक्ति की धारा शनिवार को भावपूर्ण माहौल में संपन्न हो गई। श्री राधा रमण सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन वृंदावन धाम से पधारे पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर हो उठे। कथा के समापन पर हरिनाम संकीर्तन, आरती और भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजन का विशेष आकर्षण शुकदेव जी महाराज के स्वरूप से प्रेरित होकर 51 तोतों को पिंजरे से मुक्त करना रहा।

सुदामा चरित्र ने दिया सच्ची मित्रता और निष्काम प्रेम का संदेश

कथा के दौरान पुंडरीक गोस्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा जी के प्रसंग के माध्यम से प्रेम, त्याग, निष्ठा और समर्पण का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम, श्रद्धा और समर्पण के भूखे हैं। सुदामा चरित्र सिखाता है कि सच्ची मित्रता में स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता। महाराज जी ने दुर्वासा ऋषि के शाप तथा सुदामा जी से जुड़े तंदुल के प्रसंग का भी वर्णन किया। बाणासुर की पुत्री ऊषा और अनिरुद्ध के प्रसंग के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का चित्रण किया गया, वहीं राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग से श्रीमद्भागवत कथा के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया गया।

दूध-दही के उदाहरण से समझाई भक्ति की गहराई

भक्ति की दृढ़ता समझाने के लिए पुंडरीक गोस्वामी जी ने दूध और दही का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दूध आसानी से छलक जाता है जबकि दही अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। इसी प्रकार मनुष्य को अपनी भक्ति को दृढ़ और स्थिर बनाना चाहिए जिससे उसका जीवन प्रेम, श्रद्धा और सदाचार से परिपूर्ण हो सके। भगवान श्रीकृष्ण की अष्ट पटरानियों के प्रसंग में उन्होंने उनके आध्यात्मिक स्वरूपों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को सद्कर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

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उन्होंने शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक मां दुर्गा की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने और रामचरितमानस का पाठ करने का आह्वान किया। साथ ही नवमी पर कन्या पूजन और कन्या भोज की परंपरा का महत्व बताते हुए दो से दस वर्ष तक की कन्याओं का श्रद्धापूर्वक पूजन और भोजन कराने की बात कही।

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‘प्यारो-प्यारो मोहन’ पर झूम उठा कथा पंडाल

कथा के अंतिम दिन भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। जब महाराज जी ने ‘प्यारो-प्यारो मोहन, वंशी वालो मोहन, मेरो माखन चुराय गयो रे’ भजन का भावपूर्ण गायन किया, तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भजन की धुन पर झूमने लगे और वातावरण कृष्णभक्ति से सराबोर हो गया।

आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि विश्राम दिवस पर शुकदेव जी महाराज के स्वरूप से प्रेरित होकर 51 तोतों को पिंजरे से मुक्त किया गया। इसके बाद विश्राम आरती हुई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। भव्य भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

कार्यक्रम में राजेंद्र कुमार अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, मुन्ना, समीर मित्तल, नवीन गुप्ता, रोहित अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अनुराग मिश्रा, आनंद रस्तोगी, शिवम अग्रवाल, आरएन सिंह, सुनील कुमार मिश्रा, कुश मिश्रा, दिव्यांशु शुक्ला और साकेत शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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