न्यूज डेस्क, 16 जून 2026:
राम मंदिर के चढ़ावे में करोडों के घपले के मुद्दे पर कांग्रेस ने पहली बार खुलकर केंद्र सरकार और भाजपा-आरएसएस पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि देश की आस्था के साथ छल किया गया है और धर्म के नाम पर सौदा किया जा रहा है। ये संगठित लूट है इसकी सिटिंग जज से जांच कराई जाए।
प्रेस वार्ता में अजय राय के साथ विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना भी मौजूद रहीं। अजय राय ने कहा कि रामजन्मभूमि से जुड़ी जो जानकारियां सामने आ रही हैं, वे एक संगठित लूट की तरफ इशारा करती हैं। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में बड़े लोग शामिल हैं और इस बारे में आरोप भाजपा के पूर्व सांसद भी लगा चुके हैं।
अजय राय ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रस्ट के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा लंबे समय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की जवाबदेही शीर्ष स्तर तक तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट में शामिल कुछ अन्य पदाधिकारी भी पहले से विवादों में रहे हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान शिलापूजन और अन्य अभियानों के नाम पर बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया गया था, लेकिन उसका पूरा हिसाब आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि 1400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का लेखा-जोखा सामने नहीं आया है। साथ ही मांग की कि उस दौर में जुटाई गई रकम की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार ने विशेष जांच दल का गठन कर यह स्वीकार कर लिया है कि मामले में गंभीर गड़बड़ियों की आशंका है। हालांकि कांग्रेस को मौजूदा जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है। अजय राय ने मांग की कि उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में समयबद्ध जांच कराई जाए और एसआईटी अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक करे।
अजय राय ने यह भी कहा कि जिस अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसके कामकाज को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक निगरानी जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मामले में केवल खानापूर्ति कर रही है।
वहीं आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि प्रभु राम में आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर से जुड़े कई मामलों में पहले भी सवाल उठते रहे हैं। उनके मुताबिक भूमि खरीद से लेकर निर्माण कार्यों तक कई विवाद सामने आए थे, जिनकी निष्पक्ष जांच नहीं हुई।
आराधना मिश्रा ने कहा कि मंदिर निर्माण के दौरान पहली ही बारिश में सड़क धंसने और गर्भगृह में पानी टपकने जैसी घटनाओं ने भी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर के निर्माण और चढ़ावे से जुड़े मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती गई।






