लखनऊ में ANM कर्मियों का फूटा गुस्सा : डिप्टी सीएम पाठक का आवास घेरा, पुलिस ने बसों में भरकर भेजा ईको गार्डन
कई दिन से प्रदर्शन कर रहीं संविदा और आउटसोर्सिंग महिला एएनएम, स्थायी नौकरी, समान वेतन और गृह जनपद में तैनाती की मांग, 2027 के विधानसभा चुनाव में असर पड़ने की दी चेतावनी

लखनऊ, 12 अक्टूबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से आंदोलन कर रहीं संविदा और आउटसोर्सिंग महिला एएनएम कर्मियों का सोमवार को सब्र जवाब दे गया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आईं महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने राजभवन कॉलोनी स्थित डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाएं आवास के बाहर सड़क पर बैठ गईं और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद करने लगीं। हालात को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन सक्रिय हुआ। इसके बाद सड़क पर बैठी प्रदर्शनकारी महिलाओं को बलपूर्वक हटाकर बसों में बैठाया गया और इको गार्डन भेज दिया गया।
लगातार प्रदर्शन, ज्ञापन देने के बाद भी सुनवाई नहीं होने का आरोप
प्रदर्शनकारी महिला एएनएम कर्मियों का आरोप है कि वे छह दिनों से लखनऊ में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही हैं। इस दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को कई बार ज्ञापन भी सौंपा गया लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई। लगातार अनदेखी से नाराज होकर सोमवार को उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के आवास का घेराव करने का फैसला किया।
स्थायी नौकरी से लेकर समान वेतन तक की मांग
महिला एएनएम कर्मियों की सबसे प्रमुख मांग सभी संविदा एएनएम कर्मचारियों को स्थायी करने की है। इसके साथ ही वे समान काम के लिए समान वेतन और गृह जनपद में तैनाती की मांग उठा रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
महिला कर्मियों ने स्वास्थ्य बीमा और नियमित ईपीएफ (EPF) अंशदान सुनिश्चित करने की मांग भी की। इसके अलावा कार्यस्थल पर महिलाओं की शिकायतों के निस्तारण और सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए विशाखा कमेटी गठित करने की मांग उठाई।

मांगें नहीं मानीं तो चुनाव में दिखेगा असर
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने साफ चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो इसका असर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। उनका कहना है कि लंबे संघर्ष के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होना निराशाजनक है।






