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Book Launch : रील्स के दौर में किताबों का संदेश, योगी बोले- लाइक्स के पीछे नहीं, जिंदगी में आगे बढ़ें युवा

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा : मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का लोकभवन में विमोचन, बोले सीएम- एक-दो घंटे अच्छी किताबें पढ़ने से मिल सकती है जीवन को नई दिशा, गांव-गांव के पुस्तकालयों तक पहुंचेगी पुस्तक

लखनऊ, 14 अक्टूबर 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में बुधवार को आयोजित समारोह में सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा : मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया। इस दौरान योगी ने युवाओं को स्मार्टफोन पर घंटों स्क्रॉलिंग, सोशल मीडिया पर रील्स और लाइक्स की होड़ के बीच किताबों की दुनिया से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में समय बिताने के बजाय युवा अपनी वास्तविक जिंदगी को बेहतर बनाने पर ध्यान दें। अगर रोजाना स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले पांच से सात घंटे में से एक-दो घंटे भी अच्छी पुस्तकें पढ़ने में लगाए जाएं तो जीवन को नई दिशा मिल सकती है।

योगी ने कहा कि अच्छी पुस्तकें जीवन की सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक होती हैं। महापुरुषों की जीवनियां और आत्मकथाएं पढ़ने से संघर्षों के बीच आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की जीवनगाथा इसका सशक्त उदाहरण है। उन्होंने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का सफर तय किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह आत्मकथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

हर पंचायत में पुस्तकालय, डिजिटल लाइब्रेरी पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में पुस्तकालय की व्यवस्था विकसित की जा रही है। प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं। इनमें एक कक्ष पुस्तकालय के लिए निर्धारित है। यहां गांव के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। डिजिटल लाइब्रेरी के विकास के साथ बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में भी पुस्तकालयों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा भी व्यापक स्तर पर इन पुस्तकालयों तक पहुंचनी चाहिए। सरकार इसके लिए प्रयास करेगी।

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लखनऊ से गोरखपुर तक पुस्तकों की बढ़ी मांग

योगी ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के पुस्तक मेलों का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआत में आयोजकों को संदेह था कि डिजिटल दौर में पुस्तकें कौन खरीदेगा लेकिन लखनऊ में मेले को अच्छा प्रतिसाद मिला। इसके बाद गोरखपुर में लखनऊ से भी अधिक पुस्तकें बिकीं। हाल में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में भी युवाओं और विद्यार्थियों की उत्साहजनक भागीदारी रही। उन्होंने कहा कि लोगों में पढ़ने की रुचि मौजूद है, जरूरत उन्हें बेहतर मंच देने की है।

राष्ट्रपति बनने के बाद भी गांव व पुराने साथियों से बना रहा जुड़ाव

मुख्यमंत्री ने रामनाथ कोविन्द के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानपुर के परौंख गांव के गरीब परिवार में जन्मे कोविन्द ने बचपन में ही मां को खो दिया था। गांव के विद्यालय से पढ़ाई शुरू कर उच्च शिक्षा हासिल की और अधिवक्ता के रूप में गरीबों तथा वंचितों की आवाज बने। इसके बाद उन्होंने संगठन, राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनका गांव, पुराने साथियों और परिचितों से जुड़ाव बना रहा।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बड़ा पद मिलने के बाद भी संस्कार और विचार नहीं बदलने चाहिए। वहीं, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि गरीब परिवार में जन्मा व्यक्ति अपनी योग्यता से राष्ट्रपति बन सकता है, यही भारतीय गणतंत्र की खूबसूरती है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कोविन्द के जीवन को ‘कच्चे घर, पक्के इरादे’ की यात्रा बताते हुए विधायकों के लिए पुस्तक की 500 प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द और उनकी पत्नी सविता कोविन्द का सम्मान किया। इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, राज्यमंत्री असीम अरुण, प्रकाशन समूह के कपिश मेहरा समेत कई लोग उपस्थित रहे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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