लखनऊ, 28 मई 2026:
यूपी सरकार की नीतियों, कड़े फैसलों और तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था ने प्रदेश के गन्ना उद्योग में एक नया इतिहास रच दिया है। वर्ष 2017 से अब तक राज्य के गन्ना किसानों को रिकॉर्ड 3,22,722 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह आंकड़ा पूर्ववर्ती सरकारों के ढुलमुल ढर्रे पर करारी चोट है। अब भुगतान की पूरी धनराशि बिना किसी हेरफेर के सीधे किसानों के बैंक खातों में (DBT के माध्यम से) भेजी जा रही है।
इसने ग्रामीण इलाकों से बिचौलियों के सिंडिकेट को पूरी तरह उखाड़ फेंका है। गन्ना एवं चीनी उद्योग अब प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है। चालू पेराई सत्र 2025-26 में ही अब तक 30,831.81 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। लगभग 90 प्रतिशत किसानों का हिसाब चुकता है। जिन चीनी मिलों का भुगतान शेष है उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय से सख्त लहजे में जल्द से जल्द भुगतान निपटाने के निर्देश दे दिए गए हैं।

स्मार्ट गन्ना किसान से सिस्टम हुआ हाईटेक
अब किसानों को पर्चियों और सट्टे के लिए मिलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। सरकार की अनूठी स्मार्ट गन्ना किसान प्रणाली के आने से गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने का पूरा तामझाम पूरी तरह ऑनलाइन हो चुका है। अब किसानों को उनकी गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल पर एसएमएस के जरिए मिलती है। इससे भ्रष्टाचार की आशंका भी खत्म हो गई है।
मिलें कम, फिर भी उत्पादन और रिकवरी में यूपी नंबर वन
पेराई सत्र 2025-26 के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में कुल 121 चीनी मिलें हैं। इनमें उप्र राज्य चीनी निगम की 3, सहकारी संघ की 23 और निजी क्षेत्र की 95 मिलें हैं। इनके द्वारा 877.96 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.68 लाख टन चीनी का बंपर उत्पादन किया गया है। इसकी तुलना में महाराष्ट्र में 210 चीनी मिलें हैं। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश का औसत चीनी परता 10.21 प्रतिशत दर्ज किया गया है। यह देश में बेमिसाल है। प्रदेश ने इस मोर्चे पर अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है। महाराष्ट्र का चीनी परता महज 9.49 प्रतिशत और कर्नाटक 8.19 प्रतिशत पर ही सिमट गया है।
मूल्य वृद्धि से 3000 करोड़ का अतिरिक्त लाभ
किसानों की समृद्धि को सर्वोपरि रखते हुए योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी का ऐतिहासिक कदम उठाया। सत्र 2025-26 में गन्ने की दरों में 30 रुपये प्रति क्विंटल का भारी इजाफा किया गया। इसके तहत अगेती प्रजातियों के लिए 400 और सामान्य प्रजातियों के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की गई। इस फैसले से प्रदेश के गन्ना किसानों की जेब में 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुनाफा पहुंचा है। समयबद्ध भुगतान और नीतियों से प्रदेश के 48 लाख गन्ना किसान परिवारों के जीवन में आर्थिक संपन्नता आई है।






