Navaratri : बड़ी काली मंदिर पहुंचे मंत्री जयवीर सिंह, दर्शन-पूजन के साथ 26 देवी मंदिरों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ
83 करोड़ से संवरेगा प्रदेश का धार्मिक पर्यटन, बड़ी काली मंदिर के विकास को 227.83 लाख रुपये मंजूर, प्रमुख शक्तिपीठों के साथ अल्पज्ञात देवी मंदिरों को भी मिलेगी नई पहचान

लखनऊ, 14 अक्टूबर 2026:
नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ यूपी में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी है। प्रदेश के 26 देवी मंदिरों में मिशन शक्ति के तहत विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रमुख शक्तिपीठों से लेकर स्थानीय स्तर पर आस्था के केंद्र रहे अल्पज्ञात देवी मंदिरों तक विकास कार्यों को गति दी जा रही है। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को लखनऊ के चौक स्थित बड़ी काली मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद नवरात्रि विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि बड़ी काली मंदिर के पर्यटन विकास के लिए सरकार ने 227.83 लाख रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत की है।
83 करोड़ की 22 परियोजनाओं से संवरेंगे देवी धाम
प्रदेश में वर्ष 2017 से देवी मंदिरों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों में 19 जिलों के 20 देवी स्थलों पर करीब 83 करोड़ रुपये की लागत से 22 प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाना है। उत्तर प्रदेश के शक्तिपीठ पर्यटन सर्किट में सहारनपुर का मां शाकुंभरी देवी मंदिर, नैमिषारण्य का मां ललिता देवी मंदिर, बलरामपुर का देवीपाटन मंदिर, विंध्याचल की मां विंध्यवासिनी और वाराणसी की मां विशालाक्षी देवी जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं।
प्रमुख शक्तिपीठों पर सुविधाओं का विस्तार
सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ में करीब 39 करोड़ रुपये की लागत से तीन परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें पर्यटक विश्राम गृह, ओपन एयर थिएटर, पैदल मार्ग का सुदृढ़ीकरण और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा। नैमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी मंदिर में 15.23 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की गई है जबकि लखनऊ के मां चंद्रिका देवी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण पर 6.30 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
इसके अलावा भदोही के श्री सीता समाहित स्थल के पर्यटन विकास के लिए 3.52 करोड़ रुपये, बलरामपुर के देवीपाटन मंदिर में 3.29 करोड़ रुपये और प्रयागराज के अलोपी देवी शक्तिपीठ में 1.67 करोड़ रुपये की फसाड लाइटिंग परियोजनाएं शामिल हैं। इन कार्यों से मंदिर परिसरों की सुंदरता बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं की यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर है।

छोटे शहरों के देवी मंदिरों को भी मिलेगी पहचान
धार्मिक पर्यटन का दायरा अब उन मंदिरों तक भी बढ़ाया जा रहा है जिनकी मान्यता मुख्य रूप से स्थानीय श्रद्धालुओं तक सीमित रही है। इनमें बिजनौर का मां रुक्मणी गाला माता मंदिर, पीलीभीत का गुंगा देवी मंदिर, देवरिया का करमेल माता मंदिर, ललितपुर का देवा माता मंदिर, बहराइच का मां गुल्ला वीर मंदिर, श्रावस्ती का मां जगत जननी सीता माता मंदिर और गौतम बुद्ध नगर का मां भुड़ावाली देवी मंदिर शामिल हैं। रायबरेली, बांदा, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, जौनपुर और कानपुर नगर के कई देवी स्थलों को भी विकास योजनाओं से जोड़ा गया है।
धार्मिक यात्रा से स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘विजिट माय स्टेट, उत्तर प्रदेश’ अभियान के तहत यूपीएसटीडीसी ने लखनऊ से नैमिषारण्य और प्रयागराज से विंध्याचल के लिए साप्ताहिक पर्यटन यात्राएं शुरू की हैं। इनमें भोजन, जलपान और स्थानीय गाइड की सुविधाएं शामिल हैं। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक सरकार का उद्देश्य आस्था को अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। बेहतर प्रकाश व्यवस्था, पैदल मार्ग और विश्राम सुविधाओं से महिलाओं, बुजुर्गों और परिवारों की यात्रा सुगम होगी। वहीं, बढ़ती पर्यटन गतिविधियों से महिला स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों, फूल-माला एवं प्रसाद विक्रेताओं, स्थानीय गाइडों और खानपान व ठहरने की सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो सकेंगे।






