UP Panchayat Election : हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 3 महीने में कराएं चुनाव, निवर्तमान प्रधानों को ये राहत
प्रदेश सरकार के फैसले में दखल नहीं, प्रशासक के रूप में बने रहेंगे निवर्तमान ग्राम प्रधान, सरकार और निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने का निर्देश

प्रयागराज/लखनऊ, 14 अक्टूबर 2026:
यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव की सियासी हलचल तेज होने के आसार हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त किए गए निवर्तमान प्रधानों को भी राहत दी है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक वे फिलहाल प्रशासक के पद पर बने रहेंगे।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने पंचायत चुनाव में देरी और निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली 11 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया। इनमें छह जनहित याचिकाएं भी शामिल थीं।
याचिकाओं में योगी सरकार के 25 मई के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसके तहत ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए जाने और प्रशासकों की नियुक्ति के फैसले पर सवाल उठाए थे। मामले में उत्तर प्रदेश सरकार, निदेशक पंचायती राज, डीएम, मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायती राज अधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था।
सभी याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के शासनादेश में कोई बदलाव नहीं किया। इससे निवर्तमान प्रधानों के प्रशासक बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, अदालत ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया है।
विधानसभा से पहले पंचायत चुनाव की बढ़ सकती है सरगर्मी
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर हलचल बढ़ने की संभावना है। पंचायत चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता के बीच अदालत ने चुनाव कराने के लिए तीन महीने की समयसीमा तय कर दी है। ऐसे में अब राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की तैयारियों पर नजर रहेगी।
प्रदेश की राजनीति में पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम राजनीतिक गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, चुनाव की तारीखों और कार्यक्रम को लेकर अंतिम स्थिति निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के बाद ही स्पष्ट होगी।






