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ईरान से इजराइल को बचाने में अमेरिका हुआ कमजोर, मिसाइल भंडार में आई भारी कमी

वॉशिंगटन | 26 जुलाई 2025

ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन तक चले युद्ध को एक महीना बीत चुका है, लेकिन उसके प्रभाव अभी भी सामने आ रहे हैं। इस लड़ाई में जहां इजराइल और ईरान को नुकसान हुआ, वहीं अमेरिका को भी इस युद्ध में भारी कीमत चुकानी पड़ी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल को ईरानी मिसाइलों से बचाने के प्रयास में अमेरिका अपने इंटरसेप्टर मिसाइल भंडार का एक बड़ा हिस्सा पहले ही खर्च कर चुका है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका की करीब 25% इंटरसेप्टर मिसाइलें इस युद्ध में खर्च हो गईं। इन्हें दोबारा तैयार करने में अमेरिका को कम से कम एक साल और लगभग 2 अरब डॉलर खर्च करने होंगे। इजराइल की रक्षा के लिए अमेरिका ने अपने सबसे महंगे और एडवांस सिस्टम जैसे कि THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) की दो बैटरियां और SM-2, SM-3, SM-6 इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया। SM-2 की कीमत $2.1 मिलियन प्रति यूनिट, SM-6 की $3.9 मिलियन और SM-3 Block IB की कीमत $9.7 मिलियन है।

इससे पहले अमेरिका रेड सी में हूती विद्रोहियों के खिलाफ भी अपने कई इंटरसेप्टर मिसाइलें खर्च कर चुका था। इस कारण से अमेरिका की रक्षा तैयारियों पर बड़ा असर पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ईरान फिर से हमला करता है तो इजराइल के पास भी Arrow-3 और Iron Dome जैसे सिस्टम पर्याप्त नहीं रहेंगे।

इसके अलावा अमेरिका ने ईरान के जवाबी हमलों से निपटने के लिए कतर स्थित अल उदीद एयरबेस से पैट्रियट मिसाइलें दागीं और ईरानी न्यूक्लियर ठिकानों पर बंकर-भेदी बम और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें भी इस्तेमाल कीं।

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इस स्थिति ने अमेरिका की रक्षा क्षमताओं और तैयारियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब वैश्विक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

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