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ED पर नाराज हुआ सुप्रीम कोर्ट, कहा- दायरे में रहकर किया जाए काम..

नई दिल्ली, 8 अगस्त 2025

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उसने ईडी को धोखेबाज़ की तरह काम न करने और कानून के दायरे में काम करने की सलाह दी है। अदालत ने ईडी द्वारा दर्ज पीएमएलए मामलों में दोषसिद्धि की कम दर पर चिंता व्यक्त की है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति कोटेश्वर सिंह की पीठ ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी की गिरफ्तारी की शक्तियों को बरकरार रखने वाले 2022 के फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने टिप्पणी की कि वह न केवल लोगों की स्वतंत्रता के बारे में बल्कि ईडी की छवि के बारे में भी चिंतित है।

न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने कहा, “पिछले पांच वर्षों में ईडी द्वारा दर्ज किए गए 5000 मामलों में से 10 प्रतिशत से भी कम मामलों में दोषसिद्धि हुई है। ईडी को धोखेबाज़ की तरह काम नहीं करना चाहिए। गवाहों को सुधारना चाहिए। क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है।” उन्होंने सवाल किया कि अगर लोग 5-6 साल की न्यायिक हिरासत के बाद बरी हो जाते हैं तो मुआवजा कौन देगा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि सभी समस्याओं का समाधान टाडा और पोटा अदालतों जैसी विशेष अदालतों में है, तथा विशेष पीएमएलए अदालतें दिन-प्रतिदिन के कार्यों को संभाल सकती हैं, जिससे मामलों का शीघ्र निपटारा हो सकेगा।

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केंद्र और ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिकाएँ जाँच के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली लोग कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल करके और कई आवेदन दायर करके जाँच में देरी कर रहे हैं। उन्होंने खुलासा किया कि इससे ईडी अधिकारियों को जाँच करने के बजाय अदालत में पेश होने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। हालाँकि, पीठ ने राजू की दलीलों को खारिज कर दिया।

 

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