लखनऊ, 3 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से फैमिली आईडी कार्ड के जरिये डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इस पहल से पारदर्शिता बढ़ी है और अपात्र या फर्जी लाभार्थियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है।
प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकार की कुल 98 योजनाओं को फैमिली आईडी से जोड़ा जा चुका है। इनका सीधा लाभ 15 करोड़ 7 लाख से अधिक नागरिकों को मिल रहा है। अब तक 44 लाख लोगों ने फैमिली आईडी पोर्टल पर आवेदन किया है। शहरी क्षेत्रों में लेखपाल और ग्रामीण इलाकों में ग्राम पंचायत अधिकारी इस पहचान पत्र को तैयार कर रहे हैं।
फैमिली आईडी 12 अंकों की एक यूनिक पहचान संख्या है, जिसमें पूरे परिवार का विवरण दर्ज रहता है। यह व्यवस्था “एक परिवार एक पहचान” की अवधारणा पर आधारित है, जिससे पात्रता का स्वतः निर्धारण हो रहा है और योजनाओं के दोहराव या गलत वितरण की संभावना खत्म हो रही है।
फैमिली आईडी लागू होने से लोगों को अब आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे। एक बार पंजीकरण होने के बाद संबंधित जानकारियां उसी डाटाबेस से उपलब्ध हो जाती हैं। इससे समय, पैसा और मेहनत तीनों की बचत हो रही है।
योगी सरकार ने यह व्यवस्था भी की है कि जिन परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं है, वे भी फैमिली आईडी के माध्यम से सरकारी योजनाओं से जुड़ सकें। इसके लिए अलग से पंजीकरण की सुविधा दी गई है, ताकि कोई भी पात्र परिवार सहायता से वंचित न रहे।
फैमिली आईडी बनवाने के लिए परिवार के सभी सदस्यों का आधार होना अनिवार्य है। साथ ही आधार का मोबाइल नंबर से लिंक होना जरूरी है, जिससे ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जा सके। जिन लोगों का मोबाइल नंबर बदल गया है, उन्हें आधार में अपडेट कराना होगा।
फैमिली आईडी व्यवस्था के तहत नागरिक आधार आधारित लॉगिन और ई-केवाईसी के जरिए स्व-पंजीकरण कर सकते हैं, जिसमें यूआईडीएआई से परिवार के सदस्यों का विवरण स्वतः प्राप्त होता है। आवेदक अपने परिवार के सदस्यों को जोड़ सकता है, जबकि लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा भौतिक सत्यापन किया जाता है। फैमिली आईडी DigiLocker पर उपलब्ध है और अब तक 19 लाख से अधिक भौतिक कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। यह कार्ड पूरी तरह निःशुल्क है, जिस पर प्रति कार्ड लगभग 8 रुपये का खर्च सरकार वहन कर रही है।






