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सकट चौथ पर ऐसे करें तिलकुट और चंद्रमा की पूजा, जानिए क्या है इस व्रत की कथा

माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सकट चौथ आज मनाया जा रहा है, जो संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सभी बाधाओं को दूर करने के लिए भगवान गणेश और सकट माता की पूजा का पर्व है

लखनऊ, 6 जनवरी 2026:

संतान सुख और समृद्धि के लिए आज माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सकट चौथ मनाया जा रहा है। इसे तिलवा चौथ, तिल-कुटा चौथ, माघी चौथ और वक्र-तुण्ड चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं सकट माता, भगवान गणेश और चंद्र देवता की पूजा अर्चना कर संतान की लंबी आयु और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। यह व्रत बेहद पुण्यदायी माना जाता है और आज का दिन इसके लिए खास महत्व रखता है।

क्या है आज का समय और शुभ योग?

सकट चौथ का व्रत आज सुबह 8:01 बजे से शुरू होकर कल सुबह 6:52 बजे तक रहेगा। आज सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7:15 से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा, प्रीति योग पूरे दिन और आयुष्मान योग रात 8:21 बजे के बाद शुरू होगा। अश्लेषा नक्षत्र आज दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा, उसके बाद मघा नक्षत्र का आरंभ होगा। यह समय पूजा और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

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पूजा-पाठ और तिलकुट की परंपरा

सकट चौथ पर महिलाएं पूजा के दौरान तिल, गुड़ और अन्य सामग्री से तिलकुट का पहाड़ बनाती हैं। कुछ जगहों पर तिलकुट बकरे का रूप लेकर उसकी पूजा की जाती है और फिर घर के किसी बच्चे द्वारा उसकी गर्दन काटी जाती है। इसके बाद प्रसाद के रूप में सभी को तिलकुट बांटा जाता है। व्रती महिलाएं शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और उसके दर्शन कर व्रत का पारण करती हैं। यह दिन मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में बाधाओं के निवारण का प्रतीक माना जाता है।

क्या है सकट चौथ का धार्मिक महत्व?

सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है। इसे करने से संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। पूजा के दौरान तिल के ढेर को चांदी के सिक्के से काटकर संतान के उज्ज्वल भविष्य और घर की खुशहाली की कामना की जाती है। यह व्रत महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है और इसे करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।

सकट चौथ की व्रत कथा क्या है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने अपने स्नान के दौरान गणेश को पहरा देने का आदेश दिया था। भगवान शिव जब अंदर आए तो गणेश ने उन्हें रोक दिया, जिससे शिव क्रोधित हो गए और गणेश का सिर काट दिया। माता पार्वती के प्रार्थना करने पर भगवान शिव ने गणेश को पुनर्जीवित किया और उनके सिर के रूप में हाथी का सिर लगाया। इस दिन से गणेश को सर्वप्रथम पूजा जाने का स्थान मिला और सकट चौथ पर उनकी पूजा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं।

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