Uttarakhand

देहरादून पहुंचीं उर्मिला सनावर : अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘पुख्ता सबूत’ का दावा, स्वामी दर्शन भारती के बयानों से बढ़ा सस्पेंस

स्वामी ने यह भी दावा किया कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर के दबाव में उर्मिला ने पहले दुष्यंत का नाम वीआईपी के तौर पर लिया, जबकि उनके अनुसार असली दोषी राठौर

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 7 जनवरी 2026:

रहस्यमय तरीके से नौ दिनों तक लापता रहीं अभिनेत्री उर्मिला सनावर मंगलवार देर रात देहरादून पहुंच गईं। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी दर्शन भारती भी मौजूद थे। दून पहुंचते ही उर्मिला के बयानों और स्वामी के दावों ने उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर चल रही बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। मीडियाकर्मियों से बातचीत में उर्मिला सनावर ने अपने ऊपर दर्ज मुकदमों को पूरी तरह निराधार बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईटी जांच के जरिए उन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। उर्मिला ने दावा किया कि वह अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े पुख्ता सबूत लेकर आई हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अंकिता को न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही पुलिस और मामले की जांच कर रही एसआईटी के सामने पेश होकर अपने पास मौजूद साक्ष्य सौंपेंगी।

स्वामी दर्शन भारती ने उर्मिला की सुरक्षित वापसी की पुष्टि करते हुए कहा कि वह देहरादून में पूरी तरह सुरक्षित हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगी। हालांकि, स्वामी के बयान विवादों में घिरते नजर आए। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर चल रहे आंदोलनों को राजनीतिक साजिश करार दिया और सीबीआई जांच की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। स्वामी का तर्क है कि सीबीआई जांच से अपराधियों को बचने का मौका मिल सकता है, जबकि एसआईटी को ही सभी सबूत सौंपे जाएंगे।

स्वामी ने यह भी दावा किया कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर के दबाव में उर्मिला ने पहले दुष्यंत का नाम वीआईपी के तौर पर लिया था, जबकि उनके अनुसार असली दोषी राठौर ही हैं। इन बयानों ने मामले को और उलझा दिया है। खास बात यह रही कि स्वामी ने किसी भी वीआईपी की संलिप्तता पर चुप्पी साधे रखी। इधर, पूर्व विधायक सुरेश राठौर को इस मामले में हाई कोर्ट से राहत मिली है और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है।

विपक्षी दलों ने स्वामी दर्शन भारती पर उर्मिला को प्रभावित करने और बयान स्क्रिप्टेड होने का आरोप लगाया है। पुलिस ने फिलहाल स्वामी के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। स्थानीय लोगों में अब भी गुस्सा और बेचैनी है। सवाल यह है कि क्या जांच सुरेश राठौर तक सीमित रहेगी या आने वाले दिनों में बड़े नाम सामने आएंगे। फिलहाल, यह मामला सस्पेंस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच और गहराता जा रहा है।

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