लखनऊ, 13 जनवरी 2026:
बुंदेलखंड की पहचान अब केवल वीरता और संघर्ष तक सीमित नहीं रही बल्कि यह क्षेत्र महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का भी सशक्त उदाहरण बनता जा रहा है। झांसी की रहने वाली प्रवेश कुमारी ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, दृढ़ इच्छाशक्ति और नवाचार के साथ ग्रामीण महिलाएं भी बड़े बदलाव की वाहक बन सकती हैं।
सीएम योगी के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के विजन को साकार करते हुए प्रवेश कुमारी ने सौर ऊर्जा से संचालित पशु चारा निर्माण यूनिट की स्थापना की। उनका स्टार्टअप ‘गोमाता कैटल फीड’ आर्थिक रूप से सफल होने के साथ पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का भी उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। यह यूनिट 18 किलोवाट की सौर ऊर्जा प्रणाली पर पूरी तरह आधारित है। इससे बिजली का खर्च लगभग शून्य हो गया है। उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है।

इस पहल का सीधा लाभ स्थानीय डेयरी किसानों को मिला है। सस्ता, पौष्टिक और उच्च गुणवत्ता वाला पशु चारा मिलने से पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और दूध उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे किसानों की आय बढ़ी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
प्रवेश कुमारी आज हर महीने लगभग 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इससे भी बड़ी उपलब्धि यह है कि उनकी यूनिट से गांव की कई अन्य महिलाओं को स्थायी रोजगार मिला है। महिलाएं अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की जिम्मेदारियों में बराबर की भागीदार बन रही हैं, जिससे गांव की सामाजिक संरचना में सकारात्मक बदलाव आया है।
आधुनिक मशीनरी, मानकीकृत तकनीक और स्थानीय बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन जैसे पहलुओं पर प्रवेश की गहरी पकड़ है। कच्चे माल की खरीद, उत्पादन योजना, गुणवत्ता नियंत्रण और वित्तीय प्रबंधन तक की जिम्मेदारी वे स्वयं संभालती हैं। उनके कुशल प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन के कारण ‘गोमाता कैटल फीड’ को कई मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
प्रवेश कुमारी बताती हैं कि उनकी शुरुआत एक छोटे प्रयास से हुई थी, जिसे उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के सहयोग और मार्गदर्शन ने एक सफल व्यवसाय का रूप दे दिया। आज वे न केवल स्वयं आगे बढ़ रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं।






