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ओडीओसी : यूपी के स्वाद को मिलेगी नई पहचान… हर जिले का खास व्यंजन बनेगा ब्रांड

बाराबंकी की चंद्रकला से लेकर आजमगढ़ का सफेद गाजर का हलवा, वाराणसी की लौंगलता, बरेली की सिवइयां, अमेठी का समोसा, बस्ती का सिरका और सिद्धार्थनगर की रामकटोरी का देसी स्वाद ग्लोबल फूड मैप पर जगह बनाएगा

लखनऊ, 17 जनवरी, 2026:

उत्तर प्रदेश की पारंपरिक खान-पान की विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए सरकार ने ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना शुरू करने का फैसला किया है। इस पहल के जरिए हर जिले के खास स्वाद को ब्रांडिंग, आधुनिक पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ा जाएगा, ताकि यूपी का देसी स्वाद ग्लोबल फूड मैप पर अपनी जगह बना सके।

इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने एक अहम बैठक की। इस बैठक में ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना पर विस्तार से चर्चा हुई। मकसद था कि हर जिले के खास व्यंजनों को आधुनिक ब्रांडिंग, बेहतर पैकेजिंग और मजबूत मार्केटिंग के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाया जाए। सरकार का कहना है कि जैसे ओडीओपी योजना से हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को पहचान मिली, वैसे ही अब पारंपरिक व्यंजनों को भी नई पहचान दी जाएगी।

हर जिले का अपना स्वाद, अपनी पहचान

प्रदेश के हर जिले का कोई न कोई खास व्यंजन है, जो उसकी पहचान बन चुका है। मैनपुरी की सोनपापड़ी, मथुरा का पेड़ा, अलीगढ़ की चमचम, हाथरस की रबड़ी, कासगंज का कलाकंद, एटा की चिकोरी, सुल्तानपुर की कड़ाही की पूरी, बाराबंकी की चंद्रकला, आजमगढ़ का सफेद गाजर का हलवा, वाराणसी की लौंगलता, बरेली की सिवइयां, अमेठी का समोसा, बस्ती का सिरका और सिद्धार्थनगर की रामकटोरी जैसे व्यंजन सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति और पहचान का हिस्सा हैं। अब इन व्यंजनों को एक संगठित ब्रांड के रूप में पेश किया जाएगा।

कारीगरों और हलवाइयों को मिलेगा सहारा

इस योजना से हलवाइयों, छोटे कारोबारियों और पारंपरिक कारीगरों को सीधा फायदा मिलेगा। सरकार चाहती है कि ये लोग सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित न रहें, बल्कि उनके उत्पाद बड़े स्तर पर बिकें। इससे रोजगार बढ़ेगा और लोगों को स्थायी आमदनी का जरिया मिलेगा।

गुणवत्ता और साफ-सफाई पर रहेगा जोर

खाने-पीने के सभी उत्पादों में गुणवत्ता, स्वच्छता और फूड सेफ्टी का खास ध्यान रखा जाएगा। हर व्यंजन को तय मानकों के मुताबिक तैयार किया जाएगा और उसकी जांच भी होगी। साथ ही, जिन व्यंजनों की खास पहचान है, उन्हें जीआई टैग दिलाने की कोशिश भी की जाएगी।

नई पैकेजिंग से मिलेगी नई पहचान

व्यंजनों की पैकेजिंग को भी आकर्षक और सुरक्षित बनाया जाएगा। फूड-ग्रेड और पर्यावरण के अनुकूल पैकेट इस्तेमाल होंगे, ताकि सामान ज्यादा दिन तक ताजा रहे। पैकेट पर क्यूआर कोड, पोषण जानकारी और जिले की कहानी भी होगी, जिससे ग्राहक उस स्वाद की पूरी पहचान जान सके।

युवाओं की पसंद का होगा ध्यान, वोकल फॉर लोकल को मिलेगा बढ़ावा

सरकार चाहती है कि पारंपरिक स्वाद के साथ-साथ युवाओं की पसंद के मुताबिक नए फ्लेवर भी तैयार किए जाएं। इससे देसी स्वाद आधुनिक दौर के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके। इस योजना से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और यूपी की पाक कला को नई पहचान मिलेगी। सरकार का कहना है कि यह पहल सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत बनने जा रही है।

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