कीर्तन से मिटता है माया का प्रभाव, अटूट विश्वास से मिलता है ईश्वर का मार्ग : रामभद्राचार्य
लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन कर्मयोग, भक्ति और रामजन्मभूमि आंदोलन पर बोले जगद्गुरु, कहा- प्रभु की सेवा में कभी नहीं होती सेवानिवृत्ति
लखनऊ, 3 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भक्ति, कर्मयोग और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संदेश देते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन की गहराइयों से परिचित कराया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु उनके विचारों को सुनकर भावविभोर हो उठे।
अपने प्रवचन में रामभद्राचार्य ने कहा कि भक्ति का सबसे प्रभावी साधन कीर्तन है। उन्होंने संस्कृत के एक रोचक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘माया’ को नर्तकी कहा गया और जब इस शब्द को पलट दिया जाता है तो ‘कीर्तन’ बन जाता है। इसका अर्थ यह है कि जब व्यक्ति कीर्तन में लीन हो जाता है तो उसके जीवन से माया का प्रभाव स्वतः समाप्त होने लगता है। वह ईश्वर के निकट पहुंचने लगता है।

उन्होंने कहा कि भक्ति का दूसरा महत्वपूर्ण आधार भगवान के प्रति अटूट विश्वास है। जिस व्यक्ति के भीतर विश्वास की दृढ़ता होती है, उसके लिए ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग सहज हो जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन की हर परिस्थिति में ईश्वर पर भरोसा बनाए रखने का आह्वान किया।
कर्मयोग पर प्रकाश डालते हुए जगद्गुरु ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्पष्ट कहा है कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म पर है। यदि व्यक्ति अपने कर्तव्यों को ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाता है तो अधिकार और सफलता स्वयं उसके पास आ जाते हैं। जीवन में उन्नति का मार्ग कर्मनिष्ठा और कर्तव्यपरायणता से होकर गुजरता है।
रामभद्राचार्य ने कहा कि सच्ची सेवा राघवेंद्र सरकार अर्थात भगवान की सेवा है। सांसारिक सेवाओं में एक समय के बाद सेवानिवृत्ति हो जाती है लेकिन प्रभु की सेवा में कभी सेवानिवृत्ति नहीं होती। वहां पेंशन या भविष्य की चिंता भी नहीं रहती क्योंकि भगवान स्वयं अपने भक्तों के योगक्षेम का वहन करते हैं। उन्होंने लोगों से अपने जीवन का अधिकाधिक समय लोकमंगल और ईश्वर सेवा में लगाने का आह्वान किया।

रामजन्मभूमि आंदोलन का स्मरण करते हुए उन्होंने कारसेवकों के बलिदान का उल्लेख किया और कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उनका विश्वास ईश्वर की व्यवस्था पर अडिग रहा। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 की घटना को भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए इसे रामभक्तों के संकल्प और आस्था की विजय बताया।
कथा के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक सपरिवार उपस्थित रहे। प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, आयोजन से जुड़े भाजपा विधायक डॉ. नीरज बोरा, नैमिषारण्य हनुमानगढ़ी के महंत पवन दास, जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति सहित कई विशिष्टजनों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया। अजीत श्रीवास्तव, आशीष अग्रवाल, भारत भूषण गुप्ता, संजीव अग्रवाल, राकेश पाण्डेय, सौरव बन्दोपाध्याय, बिन्दू बोरा, वत्सल बोरा, सुनील अग्रवाल सहित कई लोग विशेष आरती में शामिल हुए।






