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माघ कालाष्टमी पर भैरव कृपा से खुलते हैं तरक्की और सुरक्षा के मार्ग, जानिए पूजा का सही तरीका और इसका महत्व

माघ मास की कालाष्टमी पर बाबा कालभैरव की पूजा और व्रत करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है

लखनऊ, 10 जनवरी 2026:

साल 2026 की पहली माघ मास की कालाष्टमी आज मनाई जा रही है, जिसे भैरव अष्टमी भी कहा जाता है। यह व्रत माघ महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है और इसका धार्मिक औऱ आध्यात्मिक महत्व अन्य महीनों की कालाष्टमी से अधिक माना जाता है। मान्यता है कि आज के दिन भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप बाबा कालभैरव की पूजा करने से मानसिक बल और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

भय और नकारात्मकता से मुक्ति का व्रत

धार्मिक विश्वासों के अनुसार, माघ मास कालाष्टमी का विधिपूर्वक व्रत और पूजन करने से जीवन में मौजूद भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। बाबा कालभैरव की कृपा से साधक को साहस, सुरक्षा और स्थिरता का वरदान मिलता है। खास बात यह है कि आज कालाष्टमी शनिवार के दिन पड़ने से इसका प्रभाव और भी शुभ माना जा रहा है।

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आज कालाष्टमी का शुभ समय क्या है?

माघ मास कालाष्टमी की तिथि आज सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू हुई और कल दोपहर 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार, आज ही कालाष्टमी का व्रत रखा गया है। मान्यता है कि आज बाबा कालभैरव की पूजा करने से सभी प्रकार के भय और बाधाएं दूर होती हैं।

घर पर कैसे करें कालाष्टमी की पूजा?

कालाष्टमी की पूजा घर में भी सरलता से की जा सकती है। सबसे पहले पूजा स्थान पर लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और बाबा कालभैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव करें और फूल, माला, नारियल, गेरू और इमरती अर्पित करें। चौमुखी दीपक जलाकर धूप और दीप से पूजा करें और सभी को तिलक लगाएं।

पाठ, मंत्र और विशेष उपाय क्या हैं?

पूजा के दौरान शिव चालीसा, भैरव चालीसा और बटुक भैरव पंजर कवच का पाठ करें। बाबा कालभैरव के मंत्रों का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। व्रत पूर्ण होने के बाद काले कुत्ते को दूध पिलाना शुभ होता है। रात्रि में सरसों के तेल और काले तिल के दीपक से विशेष पूजा और जागरण करने से व्रत का फल और बढ़ जाता है।

कालाष्टमी का धार्मिक महत्व क्या है?

कालाष्टमी भगवान भैरव को समर्पित पर्व है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से शत्रु बाधा, भय, कष्ट और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही, यह व्रत कुंडली में मौजूद अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करने और मनोकामनाएं पूरी करने में सहायक माना जाता है।

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