योगेंद्र मलिक
देहरादून, 19 जनवरी 2026:
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हुए, आने वाली 27 जनवरी को एक साल पूरा होने जा रहा है। इसके तहत विवाह पंजीकरण अब ऑनलाइन माध्यम से बेहद आसान हो गया है। पति-पत्नी कहीं से भी अपने रिकॉर्ड और वीडियो बयान दर्ज करवा पाते हैं, जबकि पहले उन्हें दो गवाहों के साथ पंजीकरण कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ता था।
आंकड़े बताते हैं यूसीसी की सफलता
यूसीसी लागू होने के एक साल से कम समय में अबतक 4 लाख 74 हजार 447 विवाह पंजीकरण (Registration) हो चुके हैं। प्रतिदिन औसत पंजीकरण संख्या करीब 1,400 पहुंच गई है। जबकि पुराने अधिनियम में यह औसत केवल 67 था। यही नहीं, इस दौरान 316 विवाह विच्छेद, 68 लिव-इन रिलेशनशिप और 2 लिव-इन समाप्ति प्रमाणपत्र ऑनलाइन जारी किए गए।
प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी
यूसीसी के तहत आवेदन करने के बाद औसत पांच दिन में ही विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी हो जाता है। पुराने अधिनियम में ना केवल आवेदकों को कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था, बल्कि पंजीकरण की कोई निश्चित समय सीमा भी नहीं थी। इस बदलाव ने लोगों में प्रक्रिया के प्रति भरोसा बढ़ाया है।
महिला सशक्तिकरण और नागरिक अधिकारों की दिशा
यूसीसी लागू होने से न केवल प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समानता भी सुनिश्चित हुई है। यह कानून उत्तराखंड को अन्य राज्यों के लिए मॉडल बना देता है, जहां लोग अब आसानी से विवाह पंजीकरण करवा रहे हैं।
भविष्य की उम्मीदें और प्रभाव
बीते एक साल में यूसीसी ने दिखाया कि तकनीक और पारदर्शिता के माध्यम से सरकारी प्रक्रियाएं कितनी सरल बन सकती हैं। ऐसे में यह संभावना है कि आने वाले समय में और अधिक लोग ऑनलाइन माध्यम से अपने विवाह और संबंधित प्रमाणपत्र पंजीकृत करवा सकेंगे।






