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अब ‘राज’ नहीं, ‘जन’ का भवन : लखनऊ के राजभवन का नाम बदला, औपनिवेशिक छाया से मुक्ति

केंद्र सरकार के निर्देशों के क्रम में राज्यपाल के आधिकारिक आवास का बदला गया नाम, परिवर्तन की अधिसूचना भी जारी, शासकीय, प्रशासनिक और वैधानिक कार्यों में ‘जन भवन’ के नाम से ही जाना और संबोधित किया जाएगा

लखनऊ, 21 जनवरी 2026:

केंद्र सरकार के निर्देशों के क्रम में यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित राज्यपाल के आधिकारिक आवास ‘राजभवन’ का नाम बदलकर अब ‘जन भवन’ कर दिया गया है। यह नाम परिवर्तन तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। शासन स्तर पर इस संबंध में सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के साथ नाम परिवर्तन की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

राज्यपाल का यह आधिकारिक आवास अब आगे से सभी शासकीय, प्रशासनिक और वैधानिक कार्यों में ‘जन भवन’ के नाम से ही जाना और संबोधित किया जाएगा। आने वाले समय में सरकारी पत्राचार, दस्तावेज, निमंत्रण पत्र, बोर्ड और संकेतक (साइन बोर्ड) में भी ‘राजभवन’ के स्थान पर ‘जन भवन’ नाम का ही उपयोग किया जाएगा। यह प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।

यह निर्णय गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राज्यपालों और उपराज्यपालों के आवासों के नामकरण को अधिक जनोन्मुखी और एकरूप बनाने के उद्देश्य से जारी दिशा-निर्देशों के तहत लिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि ‘राज’ शब्द औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक है। इसे समाप्त करने की दिशा में यह कदम उठाया गया है।

बताया गया कि प्रारंभिक तौर पर उत्तर प्रदेश में राज्यपाल के आवास का नाम ‘लोक भवन’ रखने पर विचार किया गया था लेकिन लखनऊ में मुख्यमंत्री का प्रशासनिक कार्यालय पहले से ही ‘लोक भवन’ के नाम से संचालित हो रहा है। एक ही नाम होने से प्रशासनिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए ‘जन भवन’ नाम को अंतिम रूप दिया गया।

‘जन भवन’ नाम को जनता से जुड़ाव, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बताया गया है। इससे यह संदेश भी जाता है कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति जनता के हित में कार्य करते हैं। उनके लिए सदैव उपलब्ध हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के निर्देश पर देश के आठ राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा में राजभवन का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ किया गया है। इसके अलावा लद्दाख में उपराज्यपाल के निवास-कार्यालय को ‘राज निवास’ के स्थान पर अब ‘लोक निवास’ कहा जाएगा। यह बदलाव औपनिवेशिक काल की पहचान को समाप्त करने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।

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