Uttarakhand

अब अपने पैरों पर खड़ी हुईं पहाड़ की बेटियां… 15 हजार का बदला भविष्य, जानिए कैसे नन्दा गौरा योजना बना रही उन्हें आत्मनिर्भर

नन्दा गौरा योजना पौड़ी गढ़वाल जिले में पहाड़ की बेटियों को जन्म से लेकर शिक्षा और आत्मनिर्भरता तक सशक्त बना रही है। पांच वर्षों में 15,081 बालिकाओं को प्रत्यक्ष लाभ मिला

योगेंद्र मलिक

पौड़ी गढ़वाल, 23 जनवरी 2026:

उत्तराखंड में नंदा गौरा योजना पौड़ी गढ़वाल जिले में पहाड़ की बेटियों के लिए उम्मीद की एक मजबूत मिसाल बनकर उभरी है। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि समाज में लैंगिक असमानता को कम करने, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, मातृत्व मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर घटाने और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने में भी निर्णायक भूमिका निभा रही है।

जन्म से शुरू हुई सशक्तिकरण की कहानी

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योजना के प्रथम चरण में बालिका के जन्म पर 11 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इस वर्ष 227 बालिकाओं को यह लाभ मिला, जिसके लिए कुल 24 लाख 25 हजार रुपये खर्च किए गए। इससे संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन मिला है और परिवारों में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित हुआ।

शिक्षा और कैरियर में मजबूत आधार

योजना के द्वितीय चरण में वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनपद की 1990 इंटरमीडिएट उत्तीर्ण बालिकाओं को प्रति बालिका 51 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई। इसके माध्यम से कुल 10 करोड़ 14 लाख 90 हजार रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंच रहे हैं। इससे बालिकाओं को उच्च शिक्षा और करियर निर्माण में मजबूती मिल रही है।

पांच वर्षों में 15,081 बालिकाओं को फायदा

जनपद पौड़ी गढ़वाल में 2021 से 2026 तक नन्दा गौरा योजना के तहत लगातार लाभ प्रदान किया गया। योजना के प्रथम चरण में कुल 2207 बालिकाएं, जबकि द्वितीय चरण में 12,874 बालिकाएं लाभान्वित हुईं। पांच वर्षों में कुल 15,081 बालिकाओं को योजना का प्रत्यक्ष लाभ मिला। वर्ष 2021-22 में 4278, 2022-23 में 3251, 2023-24 में 3294, 2024-25 में 2041 तथा 2025-26 में 2217 बालिकाएं योजना से जुड़ीं। यह दर्शाता है कि नन्दा गौरा योजना बालिका जन्म से लेकर शिक्षा तक निरंतर सुरक्षा और सशक्तिकरण की मजबूत कड़ी बन चुकी है।

पारदर्शी लाभ वितरण और भरोसा

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि योजना का लाभ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से पारदर्शी रूप से दिया जा रहा है। नन्दा गौरा योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बालिकाओं के आत्मविश्वास, शिक्षा और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव है। सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र बालिका इस योजना से वंचित न रहे। नन्दा गौरा योजना के जरिए पहाड़ की बेटियों को आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक संबल मिलता है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवारों व समाज में अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं।

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