लखनऊ, 24 जनवरी 2026:
यूपी के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान पिछले दिनों हुई एक घटना को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के एक युवा नेता ने आक्रामक रुख अपनाते हुए धार्मिक और नैतिक संदर्भों के साथ अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक की है। उन्होंने लखनऊ में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर होर्डिंग लगवाकर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रति समर्थन और सम्मान व्यक्त किया है।
शरद शुक्ला के नाम से लगाई गई होर्डिंग में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ‘परमाराध्य’ बताते हुए उन्हें कोटिशः प्रणाम किया गया है। पोस्टर में मनुस्मृति और रामचरितमानस के श्लोकों का उल्लेख करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से घटना के जिम्मेदार लोगों पर तीखा प्रहार किया गया है। मनुस्मृति के श्लोक के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि गुरु या वेदाचार्य का अपमान करने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। वहीं रामचरितमानस की पंक्तियों के जरिए यह संकेत दिया गया है कि जब प्रभु की कृपा समाप्त होती है तो व्यक्ति की बुद्धि पहले ही नष्ट हो जाती है।
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट कहा है कि वह शंकराचार्य के सम्मान और सनातन परंपराओं के संरक्षण के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने प्रयागराज की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में वैमनस्य और तनाव बढ़ाने का काम करती हैं। शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रयागराज संगम जाने से रोका जो पूरी तरह गलत और निंदनीय है।
शरद युवक कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। अयोध्या क्षेत्र से जुड़े बताए जाते हैं। उनके इस कदम को कांग्रेस की ओर से एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि प्रयागराज की घटना से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और ऐसे में चुप रहना उचित नहीं था।
होर्डिंग सामने आने के बाद धर्म और राजनीति के आपसी संबंधों को लेकर बहस और तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस सहित अन्य दलों की बयानबाजी और तेज हो सकती है। इससे प्रदेश की सियासत में नया मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं।






