लखनऊ, 4 फरवरी 2026:
शुक्र ग्रह के उदय के साथ ही एक बार फिर विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभ समय लौट आया है। एक फरवरी को शुक्र का उदय हो चुका है और अब शादी-ब्याह की रौनक दिखने लगेगी। हालांकि ज्योतिषाचार्यों के बीच विवाह मुहूर्त को लेकर थोड़ी भिन्न राय है। कुछ विद्वानों के अनुसार पूर्ण रूप से शुभ विवाह लग्न पांच फरवरी ही प्रारंभ होंगे जबकि कई जगहों पर आज भी शादियां संपन्न हो रही हैं।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार विवाह जैसे मांगलिक संस्कारों के लिए गुरु और शुक्र दोनों ग्रहों का उदित होना आवश्यक माना जाता है। 12 दिसंबर से शुक्र ग्रह करीब सात सप्ताह के लिए अस्त थे। इस कारण मकर संक्रांति के बाद विवाह कार्य लगभग ठप पड़े थे। अब शुक्र के उदय के साथ पांच फरवरी से विवाह, वर-वधु मिलन और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए ग्रह-योग अत्यंत शुभ बन रहे हैं।
वहीं एक अन्य ज्योतिषाचार्य का कहना है कि आज से ही विवाह आयोजनों की शुरुआत हो जाएगी। उनके अनुसार सूर्य के मकर राशि में स्थित होने और गुरु के उदित रहने की स्थिति में शुक्र का उदय एक फरवरी को हो चुका है। इससे मांगलिक कार्यों का मार्ग प्रशस्त हो गया है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि 12 मार्च के बाद विवाह मुहूर्त सीधे अप्रैल में ही उपलब्ध होंगे।
ज्योतिषाचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष में कुछ ऐसे कालखंड भी रहेंगे जब परंपरागत रूप से विवाह नहीं किए जाते। 14 मार्च के बाद एक माह के लिए मीन खरमास लगेगा जिसमें विवाह वर्जित माने जाते हैं। इसके अलावा 17 मई से 15 जून तक अधिक ज्येष्ठ मास रहेगा, जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है। इस अवधि में भी विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते। चंद्र और सूर्य कैलेंडर के अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।
इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास आरंभ होगा जिससे विवाह कार्य रुक जाएंगे। 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के बाद फिर से शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। जानकारों के अनुसार इस वर्ष फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई, जून, जुलाई, नवंबर और दिसंबर में कई शुभ तिथियां हैं। इनमें हजारों जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधेंगे। शुक्र के उदय के साथ एक बार फिर मांगलिक आयोजनों की रौनक लौट आई और बाजार से लेकर मैरिज लॉन तक चहल-पहल बढ़ने लगी है।






