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‘बच्चे मन के सच्चे’: CM योगी बने वात्सल्य, संवेदना, जनसेवा और सुशासन की जीवंत मिसाल

मुख्यमंत्री के पास पहुंच कर बालहठ के साथ अपनी बात रखते प्रदेश के बच्चे, उनके सामने झलक पड़ता योगी का कोमल हृदय, समाज को जोड़ती है सीएम की बच्चों से यह दोस्ती, एडमिशन के साथ उपचार के लिए उपलब्ध कराते तत्काल आर्थिक सहायता

लखनऊ, 4 फरवरी 2026:

अपराधियों के लिए कड़ा संदेश देने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ का एक और मानवीय पक्ष इन दिनों चर्चा में है। ये है बच्चों के प्रति उनका स्नेह, संवेदना और त्वरित निर्णय क्षमता। स्कूल में एडमिशन की जिद हो, चॉकलेट की मासूम मांग या फिर पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का सपना, बच्चे जब मुख्यमंत्री से मिलते हैं तो बेझिझक अपने मन की बात कह देते हैं। सीएम योगी भी उतनी ही आत्मीयता से उन्हें सुनते हैं, समझते हैं और समाधान करते हैं।

हाल ही में ‘जनता दर्शन’ के दौरान मां के साथ पहुंची नन्ही अनाबी अली ने मुख्यमंत्री से अपने स्कूल एडमिशन की गुहार लगाई। एबीसीडी और कविता सुनाकर उसने सबका दिल जीत लिया। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ उसे पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया बल्कि तत्काल प्रवेश के निर्देश भी दिए। इससे पहले गोरखनाथ मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर एक बच्चे से और क्या चाहिए पूछकर उसके मासूम जवाब पर खिलखिलाकर हंसना, मुख्यमंत्री के बालप्रेम की सहज झलक थी।

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ऐसे दृश्य समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ‘जनता दर्शन’ में दो साल की अनन्या से संवाद, 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड में बच्चों का सीधे मुख्यमंत्री के पास पहुंच जाना, उनके साथ फोटो खिंचवाना और एक बच्ची को गोद में लेकर दुलार करना ये सभी पल उनके वात्सल्य भाव को दर्शाते हैं।

योगी आदित्यनाथ बच्चों के भविष्य को लेकर निर्णय लेने में भी कोई देरी नहीं करते। कानपुर की नन्ही मायरा, जो डॉक्टर बनना चाहती है, मुरादाबाद की वाची, जो पढ़ाई करना चाहती है और गोरखपुर की पंखुड़ी, इन सभी का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित कराया गया। पंखुड़ी की फीस माफ कराकर उसे दोबारा विद्यालय भेजना भी इसी संवेदनशील दृष्टिकोण का उदाहरण है।

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केवल बच्चे ही नहीं बल्कि महिलाओं और कमजोर वर्गों के मामलों में भी मुख्यमंत्री की तत्परता सामने आती है। 31 दिसंबर को एक मेजर की बेटी अंजना भट्ट ने मकान पर कब्जे की शिकायत की। इस पर 24 घंटे के भीतर न सिर्फ कब्जा मुक्त कराया गया बल्कि आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई। वहीं कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की कहानी ने लोगों को भावुक कर दिया। अकेले पैदल लखनऊ पहुंची खुशी के बनाए चित्र स्वीकार कर मुख्यमंत्री ने उसके सुरक्षित और शिक्षित भविष्य का भरोसा दिलाया।

इन मामले स्पष्ट करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए ‘प्रदेश ही परिवार’ केवल एक विचार नहीं बल्कि व्यवहार में दिखने वाली संवेदनशील सोच है जहां सुशासन के साथ-साथ मानवीय सरोकार भी उतनी ही मजबूती से जुड़े हैं।

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