लखनऊ, 5 फरवरी 2026:
यूपी के गांव अब केवल कृषि तक सीमित नहीं रहे बल्कि स्वच्छता, नवाचार और आत्मनिर्भरता की नई पहचान गढ़ रहे हैं। प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण, घर-घर कूड़ा संग्रहण और उससे खाद व आय सृजन जैसे अभिनव प्रयोगों ने प्रदेश के ग्रामीण परिदृश्य को आधुनिक और हाईटेक बना दिया है। यह बदलाव पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम होने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है।
प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित रामपुर, अमेठी, ललितपुर और एटा जिलों में अब तक प्लास्टिक कचरे से 75 किलोमीटर लंबी सड़कें तैयार की जा चुकी हैं। ये सड़कें टिकाऊ होने के साथ-साथ प्लास्टिक अपशिष्ट के बेहतर उपयोग का उदाहरण पेश कर रही हैं। सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल हुआ प्लास्टिक वह कचरा है जो पहले पर्यावरण के लिए खतरा माना जाता था।
पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह के अनुसार सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेश में वेस्ट मैनेजमेंट का एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत ग्राम पंचायतों में घर-घर कूड़ा संग्रहण की व्यवस्था शुरू की गई है। जैविक कचरे से वर्मी खाद का उत्पादन कर पंचायतें अपने खर्च निकाल रही हैं। इसके साथ आय भी अर्जित कर रही हैं। इस पहल से अब तक तीन करोड़ रुपये से अधिक की आय सृजित की जा चुकी है।
इसके साथ ही प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों के माध्यम से 29 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई हुई है। पंचायती राज विभाग ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल पर काम करते हुए कूड़े को संसाधन में बदलने का अभियान चला रहा है। स्वच्छ गांव महाभियान के तहत कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उसे विकास का माध्यम बनाया जा रहा है।
अमित कुमार सिंह ने बताया कि विभाग ग्राम पंचायतों को नवाचार के जरिए सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। गांव-गांव स्वच्छता अभियान और प्लास्टिक वेस्ट के यूटिलाइजेशन से जहां पर्यावरण सुरक्षित हो रहा है वहीं करोड़ों रुपये की आय भी सृजित हो रही है। आने वाले समय में इस योजना के तहत प्रदेश के हर गांव में ऐसे अभिनव प्रयोग किए जाएंगे जिससे गांव स्वच्छ, सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकें।






