IT शेयर लुढ़के… सेंसेक्स-निफ्टी पर बिकवाली हावी, जानिए क्या है बाजार का हाल
शेयर बाजार पर आज बिकवाली का दबाव साफ नजर आया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट आई। IT-ऑटो शेयरों की कमजोरी, कमजोर ग्लोबल संकेत और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी
बिजनेस डेस्क, 6 फरवरी 2026:
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत आज सुस्त रही। क्योंकि शुरुआती घंटे में ही बिकवाली हावी होती दिखी, जिससे सेंसेक्स करीब 200 अंक टूटकर 83,100 के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी में भी कमजोरी देखने को मिली और यह लगभग 80 अंक फिसलकर 25,550 के स्तर के पास पहुंच गया।
IT और ऑटो शेयरों में ज्यादा बिकवाली
आज के कारोबार में IT सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव बना रहा। इसके अलावा ऑटो, FMCG, फार्मा, मीडिया, प्राइवेट बैंक और मेटल सेक्टर के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 शेयर गिरावट के साथ ट्रेड करते नजर आए, जबकि केवल 12 शेयरों में तेजी बनी रही। वहीं निफ्टी-50 के 36 शेयर नुकसान में चलते दिखे।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों से कमजोर संकेत
ग्लोबल बाजारों से भी घरेलू बाजार को खास सहारा नहीं मिला। जापान का निक्केई इंडेक्स हल्की तेजी के साथ 54,073 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.87 फीसदी गिरकर 5,067 के करीब आ गया। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 26,566 के आसपास कमजोर बना रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त के साथ 4,080 के पास कारोबार करता नजर आया। अमेरिका में भी 5 फरवरी को डाउ जोंस, नैस्डैक और S&P 500 गिरावट के साथ बंद हुए थे।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी वजह
बाजार पर दबाव की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रही। 5 फरवरी को विदेशी निवेशकों ने 1,692 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 924 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की। दिसंबर 2025 में विदेशी निवेशकों ने कुल 34,350 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे, जबकि घरेलू निवेशकों ने 79,620 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
कल भी बाजार रहा था कमजोर
इससे पहले गुरुवार को भी बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था। गुरुवार को सेंसेक्स 503 अंक गिरकर 83,313 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 133 अंक टूटकर 25,642 के स्तर पर आ गया था। उस दिन मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली थी और ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, FMCG, IT, फार्मा, मीडिया, प्राइवेट बैंक, रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर दबाव में रहे थे।






